विद्या प्राप्त करनी है तो प्रमाद छोड़ना होगा : साध्वी वैराग्यपूर्णाश्री

– पदमावती माता का जाप एवं एकासना किया
– आयड़ जैन तीर्थ में चातुर्मासिक प्रवचन की धूम जारी


उदयपुर@RajsamandTimes। श्री जैन श्वेताम्बर महासभा के तत्वावधान में तपागच्छ की उद्गम स्थली आयड़ तीर्थ पर बरखेड़ा तीर्थ द्वारिका शासन दीपिका महत्ता गुरू माता सुमंगलाश्री की शिष्या साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री आदि साध्वियों के सानिध्य में शुक्रवार को  प्रात: सवा नौ बजे से भक्तामर स्तोत्र पाठ के पश्चात पारसनाथ भगवान की चरण सेविका राजराजेश्वरी ,एक भवावतारी, पद्मावती माता का जाप करवाया गया। महासभा के महामंत्री कुलदीप नाहर ने बताया कि आयड़ तीर्थ के आत्म वल्लभ सभागार में तप उपवास शंखेश्वर पाश्र्वनाथ भगवान की आराधना करवायी गई। वहीं प्राकृतिक चिकित्सा शिविर का शुभारंभ हुआ।
चातुर्मास संयोजक अशोक जैन ने बताया कि प्रवचनों की श्रृंखला में प्रात: 9.15 बजे साध्वी प्रफुल्लप्रभाश्री व वैराग्यपूर्णा ने कहां कि विद्या प्राप्त करनी है तो प्रमाद छोडऩा होगा। प्रमाद छोड़ बिना कभी आध्यात्मिक हो या भौतिक किसी तरह की विद्या की प्राप्ति नहीं हो सकती है। जैन रामायण का वर्णन करते हुए बताया कि किस तरह दशामुख ओर उसके भाईयों को उसकी माता केतकी बताती है कि लंका का राज राजा इन्द्र ने उसके परदादा को मारकर छीन लिया। दशानन अपने भाई कुम्भकर्ण व विभीषण के साथ वन में जाकर साधना करता है। वहां दशानन एक हजार तरह की विद्याएं सीखता है। धर्मसभा में जिनशासन की आराधना व साधना करते हुए आसन व मुद्रा किस तरह होनी चाहिए इस बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि बिना आसन व मुद्रा के कोई आराधना नहीं हो सकती। बिना आसन के मुद्रा भी फेल हो जाती है। मुद्रा व आसन का करीबी सम्बन्ध है। स्तुति करते समय सही मुद्रा के साथ नम्रता भी जरूरी है।  जैन श्वेताम्बर महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या ने बताया कि आयड़ जैन तीर्थ पर प्रतिदिन सुबह 9.15 बजे से चातुर्मासिक प्रवचनों की श्रृंखला में धर्म ज्ञान गंगा अनवरत बह रही है।