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वन भूमि पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं, जिला प्रशासन ने वन विभाग को दिए सख्त निर्देश – अतिक्रमण हटाएं

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राजसमन्द। जिला प्रशासन ने वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सख्त से सख्त कार्यवाही करते हुए अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं।
जिला कलक्टर अरविन्द कुमार पोसवाल ने राजसमन्द के उप वन संरक्षक को इस आशय के निर्देश दिए हैं। इनमें कहा गया है कि कतिपय भूमाफिया/लोगों द्वारा नाथद्वारा में आचार संहिता की आड़ में वन भूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है जिसकी लगातार शिकायतें मिल रही हैं।
जिला कलक्टर ने उप वन संरक्षक को कठोर निर्देश दिए हैं कि यह सुनिश्चित करें कि वन भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न हो। यह भी निर्देशित किया गया है कि वन विभाग के संबंधित अधिकारी को अतिक्रमित किए गए स्थानों को चिह्नित कर नोटिस के जरिये अतिक्रमण हटाने के लिए पाबन्द करें और नियमानुसार समुचित कार्यवाही करें। कार्यवाही रिपोर्ट से जिला प्रशासन को भी अवगत कराए।
जिला कलक्टर ने उप वन संरक्षक को यह भी निर्देश दिए हैं कि वन भूमि पर इस प्रकार का अतिक्रमण न हो, इसके लिए वन विभाग के स्तर पर आम जन से अपील की जाए।
जिला कलक्टर ने इस बारे में जिला पुलिस अधीक्षक, उदयपुर के मुख्य वन संरक्षक, नाथद्वारा उपखण्ड अधिकारी एवं नाथद्वारा नगरपालिका आयुक्त को भी जानकारी एवं आवश्यक कार्यवाही के लिए लिखा है।

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चिकित्सा राज्यमंत्री ने नाथद्वारा चिकित्सालय का किया औचक निरीक्षण

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सफाई व्यवस्था सुधारें, छोटी बीमारियों में भी रैफर करने की प्रवृति को बदलें  – डॉ. सुभाष गर्ग


राजसमन्द 25 फरवरी/ तकनीकी शिक्षा, संस्कृत शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार), चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, आयुर्वेद और भारतीय चिकित्सा विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं (ईएसआई) विभाग, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग सोमवार को प्रातः नाथद्वारा के राजकीय चिकित्सालय पहंंुचे और चिकित्सालय परिसर, ट्रोमा सेन्टर आदि का सघन निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था में काफी खामियां पायी जाने पर प्रमुख चिकित्साधिकारी को सख्त निर्देश दिए कि प्रतिदिन प्रातः 9 बजे से पूर्व पूरे अस्पताल की सफाई करवाना सुनिश्चित करें। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने आउटडोर रजिस्टर की जांच की तथा सभी वाडोर्ं का सघन निरीक्षण किया। 200 बेड की क्षमता वाले अस्पताल में आउटडोर मरीजोें का इन्द्राज अधिक होने तथा अन्दर मरीज बहुत कम होने पर मंत्री ने नाराज़गी जताई और प्रमुख चिकित्साधिकारी को निर्देश दिए कि छोटी-छोटी बीमारियों पर भी मरीज को अन्यत्र रैफर करने की प्रवृति को त्यागें और यहीं पर सही ईलाज करें। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री निःशु   ल्क दवा योजना के तहत दवाईयों की उपलब्धता संबंधित जानकारी ली तथा वार्ड में भर्ती महिलाओं से चिकित्सकीय व्यवस्थाओं के बारे में बातचीत की।
ड्यूटी ज्वाईन नहीं करने वाले डॉक्टर्स के खिलाफ होगी कार्यवाही
अभी हाल ही नाथद्वारा चिकित्सालय के लिए सरकार द्वारा नियुक्त किए गए 15 चिकित्सकों में से मात्र दो-तीन चिकित्सकों के ही ज्वाईन करने को मंत्री गर्ग ने गंभीरता से लिया और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि जिन्होंने ड्यूटी ज्वाईन नहीं की है उनकी सूची उपलब्ध कराएं ताकि उनके खिलाफ आवश्यक कार्यवाही की जा सके। अस्पताल परिसर में सफाई व्यवस्था सहित अन्य अनियमितताएं पायी जाने पर उन्हाेंंने चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्साधिकारी बुद्धिप्रकाश जैन के विरूद्ध कार्यवाही करने के निर्देश मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए।


प्रभु श्रीनाथजी के दर्शन किए
राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग ने अपने नाथद्वारा दौरे के दौरान प्रभु श्रीनाथजी मन्दिर पहुंचकर प्रभु श्रीनाथजी के दर्शन किए तथा देश व प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

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राजसमन्द में नशा एवं एनिमिया मुक्त राजस्थान अभियान का आगाज सामाजिक सरोकारों के निर्वाह में युवा शक्ति आगे आए – जिला कलक्टर

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राजसमंद। एनिमिया एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या है जिस पर ध्यान देते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल करते हुए विभिन्न आयु वर्ग के लोगों में खून की कमी को पूरा करने के लिए एनिमिया मुक्त राजस्थान अभियान शुरू किया गया है। वहीं नशा समाज के लिएनासूर की तरह है जिसके कारण व्यक्ति, परिवार और समाज को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। स्वस्थ समाज के लियें विशेषरूप से विद्यार्थियों को इन दोनो कार्यक्रमों के बारे में सजगता के साथ घर-परिवार एवं अपने आस पास चर्चा करनी चाहिए। नशे से दूर रहना चाहिये तथा पोषक भोजन को लेकर सजग रहना चाहिए ।

यह आह्वान जिला कलक्टर अरविन्द पोसवाल ने सर्वोदय दिवस के उपलक्ष में यहां श्री बालष्ण विद्या भवन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में नशामुक्त एवं एनिमिया मुक्त राजस्थान अभियान के जिला स्तरीय शुभारंभ समारोह पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए किया।

जिला कलक्टर ने कहा की दोनाें ही अभियान स्वास्थ्य से जुडे़ हुए है और बिना अच्छे स्वास्थ्य के अच्छे जीवन और उन्नति की परिकल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया की संचार की विभिन्न विधाओं फिल्म्स एवं अन्य माध्यमों से आमजन को नशे से दूर रहने के लिए समय-समय पर जागरूक किया जाता रहा है। लेकिन अब इस अभियान के माध्यम से हमें नशा मुक्ति के संदेश को घर-घर पहुंचाना है।

जिला कलक्टर पोसवाल ने किशोर – किशोरियों को आयरन की दवा खिलाई तथा नशा मुक्ति हेतु सभी विद्यार्थिंयो को शपथ दिलाई। इससे पूर्व शुभारंभ कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पंकज गौड़ ने श्री अरविन्द पोसवाल का पुष्पगुच्छ एवं मेवाड़ी पगड़ी पहनाकर स्वागत अभिनन्दन किया। डॉ. गौड़ ने अतिथियों का स्वागत करते हुए अभियान की रूपरेखा एवं के अभियान के सम्पूर्ण जिले में क्रियान्वयन को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया की नशा मुक्ति अभियान के तहत सार्वजनिक परिसरों को नशा मुक्त परिसर बनाया जायेगा तथा एनिमिया मुक्ति के लियें 6 तरह के आयु वर्ग के लोगों को एनिमिया की दवा खिलाई जाएगी।

शुभारंभ अवसर पर राज्य स्तर से पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में मौजूद विभागीय जिला प्रभारी अधिकारी डॉ. तरुण चौधरी ने संबोधित करते हुए कहा की मौसमी बीमारियों की रोकथाम में विद्यार्थिंयों की अहम भूमिका के बारे में जानकारी देते बताया की छोटी-छोटी बातों ख़ासकर स्वच्छता एवं साफ-सफाई का ध्यान रख कर हम मौसमी बीमारियों विशेषकर स्वाइन फ्लू की रोकथाम में अपना योगदान दे सकते हैं।

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्ण कालिक सचिव एवं मजिस्ट्रेट नरेन्द्र गहलोत ने बताया की समाज का एक तबका नशे से ग्रस्त है और जिसके कारण समाज में अपराध को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा की नशे को कम करने के साथ ही समाज में हो रहे अपराधों में भी निश्चित गिरावट आएगी। उन्होंने एनिमिया मुक्त अभियान को भी आवश्यक बताते हुए कहा की एनिमिया के कारण कई प्रसूताओं की जान चली जाती है। इसलियें ये दोनों अभियान आमजन के लियें अतिमहत्वपूर्ण साबित होंगे।

कार्यक्रम में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी डॉ युगल बिहारी दाधीच ने विद्यार्थी जीवन में पूर्ण अनुशासन रह कर स्वास्थ्य प्रति सचेत रहने के लिए कहा तथा अभियान से आमजन को लाभान्वित करने में विद्यार्थियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में आभार विद्यालय के प्राचार्य श्री प्रमोद पालीवाल ने किया। संचालन प्राध्यापक श्री रमेश आमेटा ने किया।

कार्यक्रम में उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ इकरामुद्दीन चुड़ीगर, डॉ राजकुमार खोलियां, प्राध्यापक राकेश गोस्वामी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक एनएचएम श्री आशीष दाधीच, एपिडिमियोलोजिस्ट हरिश कुमार, जिला सलाहकार तम्बाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ हार्दिक जोशी, साईकोलोजिस्ट जमील अहमद गौरी आदि उपस्थित थे।

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सीएमएचओं ने किया सीएचसी चारभुजा का औचक निरीक्षण – निरीक्षण में पाई कमियों को तुरंत दुरूस्त करने के दिये निर्देश

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राजसमंद। सीएमएचओं डाॅ पंकज गौड़ ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चारभुजा का औचक निरीक्षण कर वहां उपस्थित चिकित्सा अधिकारी एवं स्टाॅफ को आमजन एवं रोगियों की सुविधा के लियें चिकित्सा संस्थान में तत्काल सुधार करने के लियें निर्देशित किया ।
निरीक्षण के दौरान पहुंचे खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ प्रहलाद सिंह सोलंकी, खंड कार्यक्रम प्रबंधक सुरेश कुमार, खंड लेखाकार को निर्देशित किया की डिजिटल एक्सरे मशीन को दो दिवस के भीतर इन्सटाॅल करवायें एवं मशीन संचालन हेतु एक कार्मिक को जिला चिकित्सालय में 10 दिवसीय प्रशिक्षण के लियें तुरंत भिजवायें।
सीएमएचओं डाॅ गौड़ ने अनटाईड फंड का उपयोग करते हुयें चिकित्सा संस्थान में बिजली संबंधी व्यवस्थाओं के दुरस्तीकरण के लियें तत्काल अनुमानित लागत का तकमिना बना कर पुरानी वायरींग को बदलने के लियंे निर्देशित किया तथा रोगीयों एवं आमजन के लियें आर ओ वाटर प्यूरीफायर लगवाने के लियें निर्देशित किया। साथ ही राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम की दृष्टी से संचालित उजाला क्लिनिक को संस्थान में आगे की और शिफ्ट कर तय मापदण्डानुसार व्यवस्थायें सुनिश्चि करने के लियें निर्देशित किया।

डाॅ गौड़ ने मुख्य सड़क पर चिकित्सा संस्थान के बोर्ड को दुरूस्त करने के लियें निर्देशित किया तथा खंड कार्यक्रम प्रबंधक को एनएचएम के एनएचएम के प्रोग्राम इम्पलिमेंटेशन प्लान में चिकित्सा अधिकारीयों एवं स्टाॅफ के क्वार्टर तथा चिकित्सा संस्थान में रिपेयरिंग के कार्य को शामिल करने के लियें निर्देशित किया।
डाॅ गौड़ ने चिकित्सा संस्थान में दवा वितरण केन्द्र, जांच कक्ष, चिकित्सक कक्ष, लेबर रूम, वार्ड रूम का दौरा किया तथा जहां कही कमीयां नजर आई तुरंत संबंधित कार्मिक को नोट कराया तथा आगामी एक सप्ताह में व्यवस्थायें सुचारू करने के लियें निर्देशित किया।
निरीक्षण के दौरान पुर्व जिला प्रमुख मदनलाल गुर्जर एवं अन्य ग्रामीण भी चिकित्सा संस्थान पर पहुंचे तथा चिकित्सा संस्थान के संचालन को लेकर अपने सुझाव दियें।

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स्वर्णिम विकास के इन्द्रधनुष दर्शा रहा है राजसमन्द

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राजसमन्द। प्रकृति और परिवेश की तमाम खूबियों, मन को सुकून देने वाली आबोहवा और विकास के तमाम आयामों से लेकर आधुनिक सरोकारों तक के मामले में आज का राजस्थान अपने आप में सतरंगी तरक्की का दिग्दर्शन करा रहा है।

राजस्थान का हर भूभाग अपने आप में ढेरों खासियतों से इतना अधिक भरा-पूरा है कि यहाँ प्रकृति अपने तमाम रूप-रंगों और विलक्षणताओं के साथ विद्यमान है।
राजस्थान प्रदेश में राजसमन्द झील के नाम पर स्थापित राजसमन्द जिला अपने भीतर इतनी अधिक खूबियों को समाहित किए हुए है कि जो इस भू भाग में आता है वह तन-मन के सुकून और दिमागी ताजगी के अनुभव के साथ ही इतना अधिक प्रफुल्लित हो उठता है कि बार-बार इस धरा की ओर आकर्षित होने का लोभ संवरित नहीं कर पाता। राजसमन्द के अनुपम सौन्दर्य और लोक लहरियों के आनन्द को वही जान सकता है जो यहाँ की आबोहवा में विचरण या निवास कर चुका है।
झर रहे ऎतिहासिक गाथाओं के प्रपात
प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के शौर्य और पराक्रम की गाथाओं की गूंज से ओज-तेज से भरे-पूरे राजसमन्द की पहचान देश और दुनिया में है। ऎतिहासिक और पुरातात्ति्वक महत्व के प्राचीन दर्शनीय एवं पर्यटन स्थलों, नैसर्गिक रमणीयता से परिपूर्ण पहाड़ों, घने जंगलों और हरियाली का समन्दर दर्शाती यह धरा प्राचीन काल से आकर्षण का केन्द्र रही है।
सब कुछ है अभिराम
राजसमन्द झील के नाम से प्रसिद्ध राजसमन्द जिला अपने भीतर इतनी अधिक विलक्षणताओं से भरा है कि ऎसा और कोई क्षेत्र अन्यत्र नहीं है जो जन-मन को सभी प्रकार के आनंद और उल्लास से भरा रख सके।
धार्मिक आध्यात्मिक दृष्टि से राजसमन्द जिले में एक छोर पर प्रभु श्रीनाथजी का वैभव है तो दूसरी ओर श्रीचारभुजानाथ का श्रद्धा तीर्थ, कांकरोली में भगवान श्री द्वारिकाधीश बिराज रहे हैं और जिले भर में धर्मस्थलों की दीर्घ श्रृंखला आस्था और विश्वास का समन्दर उमड़ाती रही है।
लोक लहरियोें का आकर्षण
देश-विदेश के सैलानियों के लिए राजसमन्द का मनोरम परिवेश और यहाँ की परंपराएं बहुत अधिक लुभाने वाली हैं। शिल्प-स्थापत्य, धर्म-अध्यात्म की विशेषताओं को समेटने वाले राजसमन्द जिले की कला-संस्कृति, परम्पराएं और लोक लहरियाँ अन्यतम आकर्षण जगाने वाली रही हैं।
आध्यात्मिक विभूतियों, स्वतंत्रता सेनानियों और लोक सेवियों की इस पावन धरा का जर्रा-जर्रा माधुर्य, सौहार्द और उल्लास की अनुभूति कराने वाला है।
राजसमन्दवासियों की धड़कन राजसमन्द की झील व अभिराम नौचौकी की पाल का दिग्दर्शन और सामीप्य जमीं, आसमाँ और पानी तक से जुड़ी सभी आनंदधाराओं का ऎसा अनुभव कराता है कि जो एक बार यहाँ आता है वह बार-बार राजसमन्द की धरा पर आने को उत्सुक रहता है।
श्रद्धा, सौन्दर्य और नैसर्गिक रमणीयता की त्रिवेणी बहाने वाले राजसमन्द की बहुआयामी ख्याति को सुनने वालों के मन-मस्तिष्क में भी जिज्ञासाओं का ज्वार तब तक उमड़ता रहता है, जब तक कि एक बार साक्षात न कर लें।
हिलोरें ले रहा झील का उल्लास
राजसमन्द झील के प्रति जन-मन की अगाध आस्था और आत्मीयता का उमड़ता दरिया उस समय देखने को मिला जब 44 साल के बाद झील चरम यौवन पाकर छलक उठी। करीब माह भर तक राजसमन्द झील स्थानीय और देशी-विदेशी सैलानियों, झील और प्रकृति प्रेमियों का मन मोहती रही।
जिला बने अभी कुछ वर्ष ही हुए हैं लेकिन क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों की आंचलिक विकास के प्रति सार्थक पहल और आत्मीय एवं समर्पित भागीदारी की वजह से राजसमन्द प्रदेश के विकासशील जिलों में अग्रिम पहचान बनाने लगा है और कई मायनों में विकसित क्षेत्र की ऊँचाइयां पा चुका है।
सुनहरा विकास परवान पर
बुनियादी सुविधाओं एवं सेवाओं की उपलब्धता के साथ ही विकास से जुड़े कई पहलुओं में राजसमन्द आज महानगरों की हौड़ करने लगा है।
दीर्घकालीन विकास की दृष्टि से रेल सुविधाओं में विस्तार के प्रयासों, स्टेट व नेशनल हाईवे, लोकोपयोगी संसाधनों की उपलब्धता आदि के साथ ही अनेक दूरगामी परिणाम देने वाली योजनाएं मूर्त रूप ले रही हैं। सरकार की सामुदायिक विकास तथा वैयक्तिक उत्थान की योजनाओं, कार्यक्रमों, अभियानों, परियोजनाओं आदि का ठोस क्रियान्वयन होने के साथ ही सामाजिक सरोकारों के निर्वहन में यह जिला आगे ही आगे रहा है।
गूंज रहे तरक्की के तराने
आम जन के उत्थान के लिए कई नवाचारों ने मूर्त रूप लेते हुए अपने उद्देश्यों में आशातीत सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान, स्वच्छ भारत मिशन और इसी तरह की कई गतिविधियों ने लोक जीवन और परिवेश को नई व ताजगी भरी दिशा-दृष्टि प्रदान की है।
सुकून का अहसास
जन समस्याओं के त्वरित निस्तारण की पहल, मेलों, पर्वों, उत्सवों की परंपराओं के बेहतर निर्वहन, सरकार की फ्लेगशिप योजनाओं, मुख्यमंत्री बजट घोषणाओं से लेकर विभिन्न विभागों की गतिविधियों ने क्षेत्रीय विकास और जन कल्याण की भावनाओं को साकार करते हुए आम जन को सुकून का अहसास कराया है।
जन-जन की भागीदारी से राजसमन्द जिला आज निरन्तर विकास की डगर पर तेजी से बढ़ता हुआ अपनी खास पहचान कायम करता जा रहा है। आज का राजसमन्द न केवल राजस्थान बल्कि देश के तीव्र प्रगतिशील जिलों में शामिल हो चुका है।

 

 

– डॉ. दीपक आचार्य

सहायक निदेशक (सूचना एवं जनसम्पर्क )
राजसमन्द

 

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हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक की दुर्दशा पर जिम्मेदार हुए मौन !!

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विकास के नाम पर हुए भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जाँच एजेंसी से जांच कराने की मांग

राजसमंद । राजसमंद जिला प्रशासन को धोखे में रख राष्ट्रीय स्मारक हल्दीघाटी व चेतक स्मारक के नजदीक सड़क पर बलीचा में घोड़े की मूर्ति लगाने के नाम पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने व कथित संग्रहालय नाम की दुकान के आगे आ रही पहाड़ी नष्ट करने की साजिश का मामला प्रकाश में आया हैं। पूर्व में सन २००७ की बैठकों में चेतक नाले पर बने व्यू पॉइंट पर घोड़े की मूर्ति लगाने की योजना थी।
जानकारी के अनुसार यह सोची समझी साजिश के तहत घोड़े का एकदिवसीय मेला कराने की आड़ में बेशकीमती भूमि पर अतिक्रमण का मामला है जिस पर प्रशासनिक सवा तीन लाख की अलग से स्वीकृति संदेह को गहरा करती है। उनवास ग्राम पंचायत के जनसेवकों का कहना है कि जिला प्रशासन को इसकी पूर्व में लिखित सूचना देकर किसी भी प्रकार के आवंटन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। आराजी संख्या 924 चरागाह को बिलानाम करा कर पूर्व में भी इसी तरह अतिक्रमण कर ५ बीघा जमीन तो हड़पी जा चुकी है अब शेष रह गई जमीन पर पार्किंग बना कर राजस्व नुकसान सहित ऐतिहासिक प्राकृतिक धरोहर को नब्बे फीसदी नष्ट किया जा चुका है। हालात यह है कि बलीचा निवासी वर्तमान अतिकर्मी सेवानिवृत शिक्षक द्वारा हल्दीघाटी को अपनी निजी दुकान बना कर रख दी गई है। .. रक्त तलाई – शाहीबाग-हल्दीघाटी दर्रा – चेतक समाधी व स्मारक पर्यटकों के अभाव में सूने पड़े रहते व भ्रमित सूचनाओं के आधार पर पर्यटक सीधा बलीचा जाकर उसे ही हल्दीघाटी समझ 100 रुपया खर्च कर भी मूल धरोहरों को देखने से वंचित रह जाता है।



भ्रष्टाचार की भी कोई तो सीमा होगी ? देश के प्रधान सेवक की राष्ट्रभक्ति पर शक नहीं किया जा सकता तो क्या उनके अधीन आ रहे राजसमंद के सभी जन सेवक भी उसी ईमानदारी के साथ महाराणा प्रताप के स्थलों के साथ न्याय कर रहे है ? यह सोचनीय एवं गंभीर विषय है। अब पूंजीवाद के आगे आखिर कब तक नेता व अधिकारी अपनी आँख बंद कर महाराणा प्रताप राष्ट्रीय स्मारक हल्दीघाटी सहित समूची रणभूमि के बदहाल हालात देखते रहेंगे? राष्ट्रीय महत्व के स्मारक का शिलान्यास 1997 में होता है व महाराणा प्रताप की चेतक पर अश्वारूढ़ प्रतिमा २००९ में लगती है ! बावजूद इसके संरक्षण सभी जिम्मेदार अधिकारी व नेता न जाने कौनसी हिस्सेदारी निभाने के फेर में भ्रष्ट अतिकर्मी को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने व सरकारी संग्रहालय को कागजों में दबा कर निजी दुकान की स्वीकृति दे देते है ? सत्य यह है कि २००७ में चेतक द्वारा लांघे गए ऐतिहासिक नाले पर पर्यटकों के लिए व्यू पॉइंट बनाने व यहाँ पर घोड़े की मूर्ति लगाने का प्रारूप रहा था ! अव्वल अधूरे स्मारक का उद्घाटन किया गया , सिर्फ इतना ही नहीं इसके सं्चालन की जिम्मेदारी जिला कलक्टर के अधीन १९९३ में बने कागजी महाराणा प्रताप स्मृति संस्थान को सौंपी गई। आखिर पूंजीवादी संस्थापक महासचिव श्रीमाली को यह बात कहाँ गले उतरने वाली थी। … उसके द्वारा सरकार को बौना साबित करने के चक्कर में कई हथकंडे अपनाये गए व आज पूरी पहाड़ी का प्राकृतिक स्वरुप ही नष्ट कर दिया गया हैं ! पर्यटकों को भ्रमित करने के लिए सड़कों पर बलीचा में चल रही निजी दुकान को संग्रहालय का नाम देकर देश के बड़े बड़े नेताओं सहित शीर्ष अधिकारियों इस कदर गुमराह किया हुआ कि पर्यटक हल्दीघाटी के नाम पर चल रही निजी दुकान में 100 रूपये देख मेवाड़ के महानायक वीर शिरोमणि महराणा प्रताप का नकली भाला व अन्य सामग्री देख ठगे जा रहे हैं
उदयपुर के पर्यटन विभाग ने तो जैसे समूची हल्दीघाटी पूर्व में आरटीडीसी चलाने वाले अतिकर्मी ठेकेदार को ही ठेके पर दे रखी हो ऐसा बर्ताव कर महाराणा प्रताप का दशकों से अपमान किया है। अब देखना यह है कि, कौनसा देशभक्त जनसेवक इस रणधरा की सुध लेकर भ्रष्ट पूंजीवादी ताकतों को संविधान के अनुसार न्याय दिलायेगा। स्थानीय हल्दीघाटी पर्यटन समिति के संस्थापक कमल मानव ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ,गृहमंत्री , पर्यटन मंत्री सहित प्रदेश की मुख्यमंत्री से हल्दीघाटी के विकास एवं वर्तमान तक विकास के नाम पर हुए भ्रष्टाचार की जाँच करवाए जाने की सोशल मीडिया पर ट्वीट कर माँग की है।
उल्लेखनीय है कि स्थानीय उपखण्ड स्तरीय सतर्कता समिति में २००७ में भी अतिक्रमण की शिकायत पर अतिकर्मी मोहनलाल श्रीमाली को भविष्य में किसी भी प्रकार का कोई अतिक्रमण नहीं करने को पाबंद कराया गया था।


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राजसमन्द में स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया गया

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उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने फहराया तिरंगा

राजसमन्द, 15 अगस्त/राजसमन्द जिले में स्वाधीनता दिवस हर्षोल्लापूर्वक मनाया गया। जिला मुख्यालय पर राजकीय श्री बालकृष्ण उमावि कांकरोली के खेल प्रांगण में आयोजित जिलास्तरीय मुख्य समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया, परेड निरीक्षण किया और मार्चपास्ट की सलामी ली।

श्रीमती किरण माहेश्वरी ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवाओं एवं उत्कृष्ट कार्यों के लिए जिला प्रशासन की ओर से 53 प्रतिभाओं को पारितोषिक एवं प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी एवं सांसद श्री हरिओमसिंह राठौड़ ने  स्वतंत्रता सेनानियों पं. श्री रामचन्द्र बागोरा, श्री मदनमोहन सोमाटिया एवं लीलाधर गुर्जर तथा शहीद नीम्बसिंह की पत्नी श्रीमती वीरांगना श्रीमती रोडी देवी को श्रीफल, रजत पदक एवं शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया। मिली-जुली परेड का नेतृत्व पुलिस निरीक्षक नानालाल ने किया।

   इस अवसर पर विभिन्न राजकीय एवं निजी शिक्षण संस्थाओं के छात्रा-छात्राओं ने व्यायाम पी.टी.प्रदर्शन एवं राष्ट्रपे्रम से ओत-प्रोत रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी। राजस्थान पुलिस बल के जवानों ने  घुड़सवारी के हैरतअंगेज करतब दिखाए जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

राज्यपाल का संदेश पठन अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री बृजमोहन बैरवा ने किया। समारोह का संचालन शिक्षाविद् एवं साहित्यकार श्री दिनेश श्रीमाली, डॉ. विनीता पालीवाल, श्री सतीश आचार्य एवं उषा द्विवेदी ने किया।




समारोह में सांसद श्री हरिओमसिंह राठौड़, जिलाप्रमुख श्री प्रवेशकुमार सालवी, नगर परिषद के सभापति श्री सुरेश पालीवाल, उपसभापति अर्जुन मेवाड़ा, जिला कलक्टर श्री पीसी बेरवाल, जिला पुलिस अधीक्षक श्री मनोज कुमार,  उपखण्ड अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद अग्रवाल सहित जनप्रतिनिधिगण, समाजसेवी, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधिगण, विद्यार्थीगण और बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं शहरीजन उपस्थित थे।

इस मौके पर संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को दोहराते हुए स्वाधीनता दिवस समारोह में उपस्थित सभी जनों को हाथ आगे कर नए भारत के निर्माण का संकल्प दिलाया। उन्होंने सभी तरह की बुराइयों से मुक्त भारत के निर्माण में समर्पित सहभागिता के लिए संकल्प दिलाया।

राजसमन्द – जिला कलक्टर श्री पीसी बेरवाल ने जिला कलक्ट्री में फहराया राष्ट्रीय ध्वज

स्वाधीनता दिवस पर जिला कलक्ट्री में जिला कलक्टर श्री पीसी बेरवाल ने तिरंगा फहराया। इससे पूर्व उन्होंने महात्मा गांधी की तस्वीर पर पुष्पहार पहनाया।

इस अवसर पर अतिरिक्त जिला कलक्टर श्री बृजमोहन बैरवा, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री गोविन्दसिंह राणावत,  अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री रौनक बैरागी, उपखण्ड अधिकारी श्री राजेन्द्रप्रसाद अग्रवाल सहित जिलास्तरीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इससे पहले जिला कलक्टर श्री पीसी बेरवाल ने निवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

जिला परिषद में जिला प्रमुख श्री प्रवेश कुमार सालवी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस अवसर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री गोविन्द सिंह राणावत सहित अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित थे।


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संस्कारों से परिपूर्ण शिक्षा-दीक्षा और हुनर से सँवारें, खा़स पहचान बनाएं – श्रीमती मृदुला सिन्हा

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गोवा की राज्यपाल ने राजसमन्द में बालिकाओं और महिलाओं से किया आह्वान

उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती माहेश्वरी तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती भदेल ने किया संबोधित

राजसमन्द,  22 मई/ गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने घर-परिवार की शिक्षा-दीक्षा, हुनर और संस्कारों को व्यक्तित्व विकास का मूलाधार बताया और कहा है कि समय के अनुरूप बदलाव और परिस्थितियों से सामन्जस्य बिठाकर चलना ही जीवन विकास की कला है।

उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं से कहा कि वे अपने बहुआयामी उत्थान और सामाजिक विकास के लिए सभी उपयोगी हुनरों में दक्षता प्राप्त करें और अपनी खास पहचान बनाते हुए समाज की सेवा में आगे आएं।

राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा सोमवार को राजसमन्द के भिक्षु निलयम में आयोजित पण्डित दीनदयाल उपाध्याय बालिका उत्थान शिविर के समापन समारोह में मुख्य अतिथि पद से संबोधित कर रही थी।

राज्यपाल ने भारत माता, पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं श्यामप्रसाद मुखर्जी की तस्वीर के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर समारोह की शुरूआत की।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिता भदेल, जिला प्रमुख श्री प्रवेश कुमार सालवी, नगर परिषद के सभापति श्री सुरेश पालीवाल,  शिविर संयोजिका श्रीमती संगीता माहेश्वरी सहित जन प्रतिनिधिगण, अधिकारीगण, शिविरार्थी बालिकाएं एवं महिलाएं तथा उनके परिजन, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।आठ दिवसीय यह शिविर राजसमन्द नगर परिषद, भारत विकास परिषद तथा महिला संरक्षण समिति, कोटा की ओर से आयोजित किया गया। इसमें राजसमन्द एवं आस-पास के क्षेत्रों की 1200 से अधिक बालिकाओं व महिलाओं ने हस्तकलाओं और आधुनिक विधाओं का व्यवहारिक प्रशिक्षण पाकर दक्षता हासिल की।

राज्यपाल श्रीमती सिन्हा सहित तमाम अतिथियों का प्रभु श्री द्वारिकाधीश की छवि, उपरणा, पुष्पगुच्छ एवं श्रीफल से स्वागत किया गया।

आयोजक संस्थाओं का सम्मान

राज्यपाल श्रीमती सिन्हा ने शिविर आयोजन तथा इसमें समर्पित भागीदारी के लिए नगर परिषद सभापति श्री सुरेश पालीवाल एवं आयुक्त श्री बृजेश राय, महिला संरक्षण समिति की अध्यक्ष एवं शिविर संयोजिका श्रीमती संगीता माहेश्वरी एवं श्रीमती श्वेता शर्मा, भारत विकास परिषद के श्री जयप्रकाश मंत्री एवं श्री ओमप्रकाश मंत्री सहित उल्लेखनीय सहयोगकर्ताओं को प्रभु श्री द्वारिकाधीश की छवि, श्रीफल, शॉल, उपरणा एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। राज्यपाल ने स्वच्छता बेग और बालिकाओं को दिए जाने वाले बैक्स प्रदान किए। राज्यपाल ने मंच संचालक श्री दिनेश श्रीमाली को उपरणा पहनाकर अभिनंदन किया।

राज्यपाल को सुन शिविरार्थी गद्गद् हो उठे

राज्यपाल ने बालिकाआें को पोतियां कहकर संबोधित किया और सीधे संवाद कायम करते हुए उनके घर-परिवार और संस्कारों आदि के बारे में बातचीत की, इससे बालिकाएं गद्गद् हो उठी। श्रीमती सिन्हा के उद्बोधन के दौरान कई बार करतल ध्वनि होती रही।

उन्होंने कहा कि जो बच्चे दादा-दादी के साथ रहते हैं उनमें  तीन पीढ़ियों का सामन्जस्य और सहज-स्वाभाविक जीवन व्यवहार की दीक्षा मिलती रहती है, ऎसे बच्चों का विकास अधिक होता है। उन्होंने दादा-दादी, नाना-नानी और बुजुर्गों की कथा परंपरा को भी नई पीढ़ी के लिए ज्ञानवद्र्धक और व्यवहारिक जीवनोपयोगी बताया और कहा कि इस पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

मनीषी चिन्तक एवं सुप्रसिद्ध कथाकार श्रीमती सिन्हा ने बच्चों को पुरातन आख्यानों तथा कथा-कहानी एवं कविता के माध्यम से समझाईश की और बालिकाओं का दिल जीत लिया।

हुनर देता है उल्लास और आत्मनिर्भरता

बालिका उत्थान शिविर की उपलब्धियों पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए  उन्होंने कहा कि हाथ में जब हुनर आता है तब इसका उल्लास प्रकट होता है और आमदनी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि बेटियों को विशेष सुरक्षा, शिक्षा और विकास के अवसर मुहैया कराए जाने चाहिएं क्योंकि बेटियां विशेष काम करती है। आज बेटियां जल, थल और नभ से लेकर सभी दिशाओं में अपनी धाक जमा रही हैं। बेटियों से उन्होंने पढ़-लिख और हुनर सीख कर समाज में पहचान बनाने का आह्वान किया और कहा कि अपने भीतर गौरव का भाव लाकर खुद को गौरवान्वित महसूस करने लायक काम करने में जुटे रहना चाहिए।

यह लौ हमेशा जलती रहे

उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों को सदियों से सम्मान देने की परंपरा रही है। समाज और सरकार की ओर से बेटियों के उत्थान के लिए खूब प्रयास हो रहे हैं। बालिका उत्थान शिविर की तारीफ करने हुए उन्होंने कहा कि आठ दिन तक 1200 बेटियों का साथ-साथ रहना और परस्पर सीखना कोई कम बात नहीं है। बेटियों के उत्थान की लौ हमेशा सब जगह जलती रहनी चाहिए, अंधियारा छटेगा तभी उजाला आएगा। इस दिशा में जो प्रयास हो रहे हैं वे सराहनीय हैं। बेटियां कई पीढ़ियों का निर्माण करती हैं और संस्कारित बेटी पीढ़ियों को संभाल लेती है।

आय अर्जन गतिविघियों से जोड़ेंगे

समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व का परिचय देते हुए कहा कि ज्ञान, साहित्य और अनुभवों से भरा उनका समग्र जीवन प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने बताया कि शिविर के माध्यम से विभिन्न विधाओं में रुचि रखने वाली हुनरमन्द बालिकाओं और महिलाओं को आय अर्जन गतिविधियों और योजनाओं से जोड़कर पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

सरकारी योजनाओं का लाभ लें

समारोह में बालिकाओं को संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिता भदेल ने राजसमन्द में बालिका उत्थान शिविर की सराहना की और बालिकाओं से कहा कि वे अवसराें का पूरा-पूरा लाभ लेकर अपने व्यक्तित्व को निखारें और जीवन में आगे बढ़ें। उन्होंने हुनरमंद बालिकाओं द्वारा सृजित उत्पादों को बाजार दिलाने के उद्देश्य से राजसमन्द में अमृता हाट मेले का आयोजन का आश्वासन दिया और कहा कि इसका लाभ पाएं।

उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बालिकाओं और महिलाओं के विकास और आत्मनिर्भरता प्रदान करने वाली योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी और बालिकाओं से कहा कि वे निःशुल्क हुनर विकास कोर्सेज के लिए ऑनलाईन आवेदन कर इनका फायदा उठाएं।

अनुभव सुनाए

शिवरार्थी बालिकाओं मेहनाज (राजसमंद) एवं खुशी आचार्य(भीलवाड़ा) ने अपने अनुभव सुनाए और शिविर को सभी बालिकाओं के लिए उपलब्धिमूलक और भविष्य संवारने वाला बताया। समारोह में बालिकाओं के दल ने आत्मरक्षा के व्यवहारिक प्रयोगों का प्रदर्शन किया।

जादुई करिश्मों पर झूम उठे

समारोह में जादूगर श्री आरके सोनी (जयपुर) द्वारा दिखाए गए जादुई करिश्मों से मंचासीन अतिथियों के साथ ही सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। शिविर गतिविधियों पर केन्दि्रत लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

समारोह का संचालन शिक्षाविद् एवं साहित्यकार श्री दिनेश श्रीमाली तथा आभार प्रदर्शन भारत विकास परिषद के सचिव श्री ओमप्रकाश मंत्री ने किया।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत समाजसेवी श्री भंवरलाल शर्मा, महेन्द्र टेलर, उपसभापति श्री अर्जुन मेवाड़ा, कैलाश निष्कलंक, नीलोफर बानू, विजय बहादुर, पुष्पा पालीवाल, हिम्मत मेहता, लता, गिरिराज कुमावत सहित  पार्षदों एवं आयोजक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने किया।

गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने बालिकाओं के हस्तकौशल की सराहना की

राजसमन्द, 22 मई/गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने राजसमन्द के भिक्षु निलयम में पण्डित दीनदयाल उपाध्याय बालिका उत्थान शिविर की संभागी बालिकाओं व महिलाओं द्वारा बनाई गई हस्तशिल्प सामग्री का अवलोकन किया और खूब सराहना की।

राज्यपाल ने फीता खोल कर हस्तकला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिता भदेल, जिलाप्रमुख श्री प्रवेशकुमार सालवी, नगर परिषद के सभापति श्री सुरेश पालीवाल सहित जन प्रतिनिधिगण, अधिकारीगण और गणमान्य नागरिक तथा आयोजक संस्थाओं के प्रतिनिधि व पदाधिकारीगण मौजूद थे।

बालिकाओं के आग्रह पर राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने मॉडल्स के साथ फोटो भी खिंचवाया और आशीर्वाद दिया।

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जंगली जानवरों का शिकार दण्डनीय अपराध – ऐहड़ा प्रथा की रोकथाम के लिये वन विभाग ने जारी की अपील

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राजसमन्द 10 मार्च। होली के पश्चात जिले के वन मण्डलो एवं वन क्षेत्रो में परम्परानुसार सामुहिक रूप से शिकार करने की ऐहड़ा कुप्रथा को समाप्त कर वन्यजीवों के संरक्षण के लिये वन विभाग ने अपील जारी की है ।
उपवन संरक्षक कपिल चन्द्रावल ने बताया कि पुरातन परम्परा के अनुसार होली पर्व के बाद कुछ लोग समुह बनाकर अवैध रूप से जंगली जानवरों खरगोश, तीतर, बटेर, मोर व हिरण आदि का शिकार करते है । उन्होंने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रो में भीम, देवगढ, ब्यावर, माण्डल तथा आसीन्द क्षेत्रों में ऐहड़ा प्रथा के तहत अवैध शिकार किया जाता है । उन्होंने बताया कि अवैध शिकार करना वन्यजीव सुरक्षा अधिकानियम 1972 के तहत दण्डनीय अपराध है । उन्होंने जारी अपील में बताया कि सामूहिक शिकार की एहड़ा प्रथा में भागीदार नहीं बने और निरीह वन्यप्राणियों का शिकार न कर कानूनी कार्यवाही से बचे एवं वन्यजीव संरक्षण में सहयोग प्रदान करें ।







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