श्रीनाथजी की नगरी में श्री जी रस महोत्सव का भव्य आयोजन 26 दिसंबर से – हरिभक्तों का लगेगा मेला

प्रभु श्री नाथ जी की पावन नगरी नाथद्वारा में आगामी 26 दिसंबर से 1 जनवरी तक होने वाले भव्य श्रीजी रस महोत्सव को लेकर नगरवासियों में उत्साह है।
नगर के श्री गोवर्धन उच्च माध्यमिक विद्यालय के मैदान में मंगलवार को आयोजन हेतु बनने वाले पांडाल का भूमि पूजन पंडित श्री राधा कृष्ण जी महाराज द्वारा शुभ मुहूर्त में वेद विद्यालय के प्राचार्य श्री देवकृष्ण जोशी की उपस्थिति में विधि विधानपूर्वक वैदिक मंत्रोचार द्वारा किया गया। पूजन के बाद मंडप बनाने का कार्य शुरू किया गया। पूजन में आयोजनकर्ता सहित आयोजन समिति के श्री घनश्याम काबरा, श्री गोविंद नागदा,श्री प्रदीप काबरा,पालिका उपाध्यक्ष श्री परेश सोनी, पार्षद श्री राजेंद्र सनाढ्य आदि मौजूद रहे।

आयोजन समिति के श्री घनश्याम काबरा ने जानकारी देकर बताया कि 26 दिसबंर को 7 दिवसीय श्रीजी रस महोत्सव की शुरुआत होगी। इस महोत्सव में देश विदेश के आने वाले करीब दो हजार श्रद्धालुओं के आवास व अन्य सुविधाओं को लेकर स्थानीय कमेटी द्वारा व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।


श्रीजी रस महोत्सव के दौरान विविध महोत्सवों का आयोजन किया जायेगा। 7 दिवसीय श्रीजी रस महोत्सव में प्रभु के पाणिग्रहण संस्कार एवं मेवाड़ी बारात का आलौकिक आनंद बरसेगा। श्रीनाथजी भाव कथा तथा वैष्णावाचार्य पुंडरीक गोस्वामी महाराज ब्रज रस कथा का रस बरसाएंगे।
कार्यक्रम में देश विदेश से हजारों श्रद्धालु भाग लेंगे।
26 दिसंबर से 1 जनवरी तक सुबह कथा तथा शाम को 5 बजे से उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
प्रथम दिवस 26 दिसंबर को श्री रंग महल की रंगभरी झांकी होगी। 27 दिसंबर को हंस रिझावे प्रिय प्यारी को , 28 दिसंबर को श्याम लगे श्रीराधा से और राधा रानी बनी कन्हाई, 29 दिसंबर को मिठाई महल का विशेष मनोरथ होगा, 30 दिसंबर को मधुर विवाह मंडप, 31 दिसंबर को सायं 5 बजे रस भाेग उत्सव होगा। 27 दिसंबर को सायं 7.30 बजे लुधियाना के दंडी स्वामी आश्रम द्वारा आनंदमय हरिनाम संकीर्तन और बनारस घराना के विशाल कृष्ण का नृत्य होगा। 28 दिसंबर को ‘नरसी कानूड़ा ने कहता’ की एकल नाट्य प्रस्तुति होगी। 29 दिसंबर को श्रीनाथजी के जन्माष्टमी, अन्नकूट, होरी
हिंडोला, रास पूर्णिमा सहित साल भर होने वाले उत्सवों की झांकी होगी, 30 दिसंबर को को प्रभु की भव्य बारात सजेगी जो आयोजन की एक औलोकिक छवि प्रस्तुत करेगी, 31 दिसंबर को संतों के सानिध्य में रसभरी भजन संध्या होगी।

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