स्वर्णिम विकास के इन्द्रधनुष दर्शा रहा है राजसमन्द

 


राजसमन्द। प्रकृति और परिवेश की तमाम खूबियों, मन को सुकून देने वाली आबोहवा और विकास के तमाम आयामों से लेकर आधुनिक सरोकारों तक के मामले में आज का राजस्थान अपने आप में सतरंगी तरक्की का दिग्दर्शन करा रहा है।

राजस्थान का हर भूभाग अपने आप में ढेरों खासियतों से इतना अधिक भरा-पूरा है कि यहाँ प्रकृति अपने तमाम रूप-रंगों और विलक्षणताओं के साथ विद्यमान है।
राजस्थान प्रदेश में राजसमन्द झील के नाम पर स्थापित राजसमन्द जिला अपने भीतर इतनी अधिक खूबियों को समाहित किए हुए है कि जो इस भू भाग में आता है वह तन-मन के सुकून और दिमागी ताजगी के अनुभव के साथ ही इतना अधिक प्रफुल्लित हो उठता है कि बार-बार इस धरा की ओर आकर्षित होने का लोभ संवरित नहीं कर पाता। राजसमन्द के अनुपम सौन्दर्य और लोक लहरियों के आनन्द को वही जान सकता है जो यहाँ की आबोहवा में विचरण या निवास कर चुका है।
झर रहे ऎतिहासिक गाथाओं के प्रपात
प्रातः स्मरणीय वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के शौर्य और पराक्रम की गाथाओं की गूंज से ओज-तेज से भरे-पूरे राजसमन्द की पहचान देश और दुनिया में है। ऎतिहासिक और पुरातात्ति्वक महत्व के प्राचीन दर्शनीय एवं पर्यटन स्थलों, नैसर्गिक रमणीयता से परिपूर्ण पहाड़ों, घने जंगलों और हरियाली का समन्दर दर्शाती यह धरा प्राचीन काल से आकर्षण का केन्द्र रही है।
सब कुछ है अभिराम
राजसमन्द झील के नाम से प्रसिद्ध राजसमन्द जिला अपने भीतर इतनी अधिक विलक्षणताओं से भरा है कि ऎसा और कोई क्षेत्र अन्यत्र नहीं है जो जन-मन को सभी प्रकार के आनंद और उल्लास से भरा रख सके।
धार्मिक आध्यात्मिक दृष्टि से राजसमन्द जिले में एक छोर पर प्रभु श्रीनाथजी का वैभव है तो दूसरी ओर श्रीचारभुजानाथ का श्रद्धा तीर्थ, कांकरोली में भगवान श्री द्वारिकाधीश बिराज रहे हैं और जिले भर में धर्मस्थलों की दीर्घ श्रृंखला आस्था और विश्वास का समन्दर उमड़ाती रही है।
लोक लहरियोें का आकर्षण
देश-विदेश के सैलानियों के लिए राजसमन्द का मनोरम परिवेश और यहाँ की परंपराएं बहुत अधिक लुभाने वाली हैं। शिल्प-स्थापत्य, धर्म-अध्यात्म की विशेषताओं को समेटने वाले राजसमन्द जिले की कला-संस्कृति, परम्पराएं और लोक लहरियाँ अन्यतम आकर्षण जगाने वाली रही हैं।
आध्यात्मिक विभूतियों, स्वतंत्रता सेनानियों और लोक सेवियों की इस पावन धरा का जर्रा-जर्रा माधुर्य, सौहार्द और उल्लास की अनुभूति कराने वाला है।
राजसमन्दवासियों की धड़कन राजसमन्द की झील व अभिराम नौचौकी की पाल का दिग्दर्शन और सामीप्य जमीं, आसमाँ और पानी तक से जुड़ी सभी आनंदधाराओं का ऎसा अनुभव कराता है कि जो एक बार यहाँ आता है वह बार-बार राजसमन्द की धरा पर आने को उत्सुक रहता है।
श्रद्धा, सौन्दर्य और नैसर्गिक रमणीयता की त्रिवेणी बहाने वाले राजसमन्द की बहुआयामी ख्याति को सुनने वालों के मन-मस्तिष्क में भी जिज्ञासाओं का ज्वार तब तक उमड़ता रहता है, जब तक कि एक बार साक्षात न कर लें।
हिलोरें ले रहा झील का उल्लास
राजसमन्द झील के प्रति जन-मन की अगाध आस्था और आत्मीयता का उमड़ता दरिया उस समय देखने को मिला जब 44 साल के बाद झील चरम यौवन पाकर छलक उठी। करीब माह भर तक राजसमन्द झील स्थानीय और देशी-विदेशी सैलानियों, झील और प्रकृति प्रेमियों का मन मोहती रही।
जिला बने अभी कुछ वर्ष ही हुए हैं लेकिन क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों की आंचलिक विकास के प्रति सार्थक पहल और आत्मीय एवं समर्पित भागीदारी की वजह से राजसमन्द प्रदेश के विकासशील जिलों में अग्रिम पहचान बनाने लगा है और कई मायनों में विकसित क्षेत्र की ऊँचाइयां पा चुका है।
सुनहरा विकास परवान पर
बुनियादी सुविधाओं एवं सेवाओं की उपलब्धता के साथ ही विकास से जुड़े कई पहलुओं में राजसमन्द आज महानगरों की हौड़ करने लगा है।
दीर्घकालीन विकास की दृष्टि से रेल सुविधाओं में विस्तार के प्रयासों, स्टेट व नेशनल हाईवे, लोकोपयोगी संसाधनों की उपलब्धता आदि के साथ ही अनेक दूरगामी परिणाम देने वाली योजनाएं मूर्त रूप ले रही हैं। सरकार की सामुदायिक विकास तथा वैयक्तिक उत्थान की योजनाओं, कार्यक्रमों, अभियानों, परियोजनाओं आदि का ठोस क्रियान्वयन होने के साथ ही सामाजिक सरोकारों के निर्वहन में यह जिला आगे ही आगे रहा है।
गूंज रहे तरक्की के तराने
आम जन के उत्थान के लिए कई नवाचारों ने मूर्त रूप लेते हुए अपने उद्देश्यों में आशातीत सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान, स्वच्छ भारत मिशन और इसी तरह की कई गतिविधियों ने लोक जीवन और परिवेश को नई व ताजगी भरी दिशा-दृष्टि प्रदान की है।
सुकून का अहसास
जन समस्याओं के त्वरित निस्तारण की पहल, मेलों, पर्वों, उत्सवों की परंपराओं के बेहतर निर्वहन, सरकार की फ्लेगशिप योजनाओं, मुख्यमंत्री बजट घोषणाओं से लेकर विभिन्न विभागों की गतिविधियों ने क्षेत्रीय विकास और जन कल्याण की भावनाओं को साकार करते हुए आम जन को सुकून का अहसास कराया है।
जन-जन की भागीदारी से राजसमन्द जिला आज निरन्तर विकास की डगर पर तेजी से बढ़ता हुआ अपनी खास पहचान कायम करता जा रहा है। आज का राजसमन्द न केवल राजस्थान बल्कि देश के तीव्र प्रगतिशील जिलों में शामिल हो चुका है।

 

 

– डॉ. दीपक आचार्य

सहायक निदेशक (सूचना एवं जनसम्पर्क )
राजसमन्द

 

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