राजसमन्द जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जिला कारागृह में शिविर का आयोजन

राजसमन्द। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण राजसमन्द सचिव नरेंद्र कुमार मय पैनल अधिवक्ता गोपाल आचार्य एवं श्रीमती उषा झाला द्वारा शनिवार सुबह साढ़े ग्यारह बजे जिला कारागृह, राजसमंद में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार सचिव एवं 02 पैनल अधिवक्ता द्वारा जिला कारागृह में जाकर जेल में साफ-सफाई, भोजन व्यवस्था, चिकित्सा व्यवस्था, निशुल्क विधिक सहायता तथा प्रथम बार जेल में प्रवेश करने वाले बन्दियों से वार्ता के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त की गई। नरेंद्र कुमार, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, राजसमंद नें उपस्थित बन्दियों के परिजनों को बन्दियों के कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी प्रदान की। बन्दियों के परिजनों को निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में जानकारी देते हुये बताया किया कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 की धारा 12 के तहत ऐसे व्यक्ति जो अभिरक्षा में है/बालक/महिला/एस सी/एस टी वर्ग के व्यक्ति हो/बाढ़ अथवा आपदा से ग्रस्त हो अथवा जिनकी आय 1,50,000/- रूपये वार्षिक आय से कम है, उन्हे राज्य सरकार के खर्चे पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निशुल्क व सक्षम विधिक सहायता दी जाती है। नियुक्त किये गये जाने वाले अधिवक्ता विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किये होते है तथा वरिष्ठ अधिवक्ता होते है। साथ ही जनपयोगी सेवाओं से सम्बन्धित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में लगने वाली धारा 22 बी की लोग अदालत के विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी दी तथा राष्ट्रीय लोक अदालत 13 जुलाई 2019 में राजीनामा योग्य प्रकरणों में राजीनामें के माध्यम से प्रकरण के निस्तारण हेतु आह्वान किया।


उन्होंने बन्दियों को बाल विवाह के बारे में जानकारी देते हुये बाल विवाह की उम्र लडके की 21 वर्ष तथा लडकी की 18 वर्ष है इससे कर्म उम्र के लडके व लडकी का विवाह करना अपराध माना गया है। बाल विवाह कराने, सहयोग करने वालों को भी उक्त अपराध में कम से कम 01 वर्ष की सजा का प्रावधान है। बंदियों को उनके बच्चों के बाल विवाह नही करने हेतु प्रेरित किया।

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