संस्कारों से परिपूर्ण शिक्षा-दीक्षा और हुनर से सँवारें, खा़स पहचान बनाएं – श्रीमती मृदुला सिन्हा

गोवा की राज्यपाल ने राजसमन्द में बालिकाओं और महिलाओं से किया आह्वान

उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती माहेश्वरी तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती भदेल ने किया संबोधित

राजसमन्द,  22 मई/ गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने घर-परिवार की शिक्षा-दीक्षा, हुनर और संस्कारों को व्यक्तित्व विकास का मूलाधार बताया और कहा है कि समय के अनुरूप बदलाव और परिस्थितियों से सामन्जस्य बिठाकर चलना ही जीवन विकास की कला है।

उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं से कहा कि वे अपने बहुआयामी उत्थान और सामाजिक विकास के लिए सभी उपयोगी हुनरों में दक्षता प्राप्त करें और अपनी खास पहचान बनाते हुए समाज की सेवा में आगे आएं।

राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा सोमवार को राजसमन्द के भिक्षु निलयम में आयोजित पण्डित दीनदयाल उपाध्याय बालिका उत्थान शिविर के समापन समारोह में मुख्य अतिथि पद से संबोधित कर रही थी।

राज्यपाल ने भारत माता, पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं श्यामप्रसाद मुखर्जी की तस्वीर के सम्मुख दीप प्रज्वलन कर समारोह की शुरूआत की।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिता भदेल, जिला प्रमुख श्री प्रवेश कुमार सालवी, नगर परिषद के सभापति श्री सुरेश पालीवाल,  शिविर संयोजिका श्रीमती संगीता माहेश्वरी सहित जन प्रतिनिधिगण, अधिकारीगण, शिविरार्थी बालिकाएं एवं महिलाएं तथा उनके परिजन, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।आठ दिवसीय यह शिविर राजसमन्द नगर परिषद, भारत विकास परिषद तथा महिला संरक्षण समिति, कोटा की ओर से आयोजित किया गया। इसमें राजसमन्द एवं आस-पास के क्षेत्रों की 1200 से अधिक बालिकाओं व महिलाओं ने हस्तकलाओं और आधुनिक विधाओं का व्यवहारिक प्रशिक्षण पाकर दक्षता हासिल की।

राज्यपाल श्रीमती सिन्हा सहित तमाम अतिथियों का प्रभु श्री द्वारिकाधीश की छवि, उपरणा, पुष्पगुच्छ एवं श्रीफल से स्वागत किया गया।

आयोजक संस्थाओं का सम्मान

राज्यपाल श्रीमती सिन्हा ने शिविर आयोजन तथा इसमें समर्पित भागीदारी के लिए नगर परिषद सभापति श्री सुरेश पालीवाल एवं आयुक्त श्री बृजेश राय, महिला संरक्षण समिति की अध्यक्ष एवं शिविर संयोजिका श्रीमती संगीता माहेश्वरी एवं श्रीमती श्वेता शर्मा, भारत विकास परिषद के श्री जयप्रकाश मंत्री एवं श्री ओमप्रकाश मंत्री सहित उल्लेखनीय सहयोगकर्ताओं को प्रभु श्री द्वारिकाधीश की छवि, श्रीफल, शॉल, उपरणा एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। राज्यपाल ने स्वच्छता बेग और बालिकाओं को दिए जाने वाले बैक्स प्रदान किए। राज्यपाल ने मंच संचालक श्री दिनेश श्रीमाली को उपरणा पहनाकर अभिनंदन किया।

राज्यपाल को सुन शिविरार्थी गद्गद् हो उठे

राज्यपाल ने बालिकाआें को पोतियां कहकर संबोधित किया और सीधे संवाद कायम करते हुए उनके घर-परिवार और संस्कारों आदि के बारे में बातचीत की, इससे बालिकाएं गद्गद् हो उठी। श्रीमती सिन्हा के उद्बोधन के दौरान कई बार करतल ध्वनि होती रही।

उन्होंने कहा कि जो बच्चे दादा-दादी के साथ रहते हैं उनमें  तीन पीढ़ियों का सामन्जस्य और सहज-स्वाभाविक जीवन व्यवहार की दीक्षा मिलती रहती है, ऎसे बच्चों का विकास अधिक होता है। उन्होंने दादा-दादी, नाना-नानी और बुजुर्गों की कथा परंपरा को भी नई पीढ़ी के लिए ज्ञानवद्र्धक और व्यवहारिक जीवनोपयोगी बताया और कहा कि इस पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

मनीषी चिन्तक एवं सुप्रसिद्ध कथाकार श्रीमती सिन्हा ने बच्चों को पुरातन आख्यानों तथा कथा-कहानी एवं कविता के माध्यम से समझाईश की और बालिकाओं का दिल जीत लिया।

हुनर देता है उल्लास और आत्मनिर्भरता

बालिका उत्थान शिविर की उपलब्धियों पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए  उन्होंने कहा कि हाथ में जब हुनर आता है तब इसका उल्लास प्रकट होता है और आमदनी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि बेटियों को विशेष सुरक्षा, शिक्षा और विकास के अवसर मुहैया कराए जाने चाहिएं क्योंकि बेटियां विशेष काम करती है। आज बेटियां जल, थल और नभ से लेकर सभी दिशाओं में अपनी धाक जमा रही हैं। बेटियों से उन्होंने पढ़-लिख और हुनर सीख कर समाज में पहचान बनाने का आह्वान किया और कहा कि अपने भीतर गौरव का भाव लाकर खुद को गौरवान्वित महसूस करने लायक काम करने में जुटे रहना चाहिए।

यह लौ हमेशा जलती रहे

उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों को सदियों से सम्मान देने की परंपरा रही है। समाज और सरकार की ओर से बेटियों के उत्थान के लिए खूब प्रयास हो रहे हैं। बालिका उत्थान शिविर की तारीफ करने हुए उन्होंने कहा कि आठ दिन तक 1200 बेटियों का साथ-साथ रहना और परस्पर सीखना कोई कम बात नहीं है। बेटियों के उत्थान की लौ हमेशा सब जगह जलती रहनी चाहिए, अंधियारा छटेगा तभी उजाला आएगा। इस दिशा में जो प्रयास हो रहे हैं वे सराहनीय हैं। बेटियां कई पीढ़ियों का निर्माण करती हैं और संस्कारित बेटी पीढ़ियों को संभाल लेती है।

आय अर्जन गतिविघियों से जोड़ेंगे

समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी ने राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा के व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व का परिचय देते हुए कहा कि ज्ञान, साहित्य और अनुभवों से भरा उनका समग्र जीवन प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने बताया कि शिविर के माध्यम से विभिन्न विधाओं में रुचि रखने वाली हुनरमन्द बालिकाओं और महिलाओं को आय अर्जन गतिविधियों और योजनाओं से जोड़कर पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

सरकारी योजनाओं का लाभ लें

समारोह में बालिकाओं को संबोधित करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिता भदेल ने राजसमन्द में बालिका उत्थान शिविर की सराहना की और बालिकाओं से कहा कि वे अवसराें का पूरा-पूरा लाभ लेकर अपने व्यक्तित्व को निखारें और जीवन में आगे बढ़ें। उन्होंने हुनरमंद बालिकाओं द्वारा सृजित उत्पादों को बाजार दिलाने के उद्देश्य से राजसमन्द में अमृता हाट मेले का आयोजन का आश्वासन दिया और कहा कि इसका लाभ पाएं।

उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बालिकाओं और महिलाओं के विकास और आत्मनिर्भरता प्रदान करने वाली योजनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी और बालिकाओं से कहा कि वे निःशुल्क हुनर विकास कोर्सेज के लिए ऑनलाईन आवेदन कर इनका फायदा उठाएं।

अनुभव सुनाए

शिवरार्थी बालिकाओं मेहनाज (राजसमंद) एवं खुशी आचार्य(भीलवाड़ा) ने अपने अनुभव सुनाए और शिविर को सभी बालिकाओं के लिए उपलब्धिमूलक और भविष्य संवारने वाला बताया। समारोह में बालिकाओं के दल ने आत्मरक्षा के व्यवहारिक प्रयोगों का प्रदर्शन किया।

जादुई करिश्मों पर झूम उठे

समारोह में जादूगर श्री आरके सोनी (जयपुर) द्वारा दिखाए गए जादुई करिश्मों से मंचासीन अतिथियों के साथ ही सभी दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे। शिविर गतिविधियों पर केन्दि्रत लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया।

समारोह का संचालन शिक्षाविद् एवं साहित्यकार श्री दिनेश श्रीमाली तथा आभार प्रदर्शन भारत विकास परिषद के सचिव श्री ओमप्रकाश मंत्री ने किया।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत समाजसेवी श्री भंवरलाल शर्मा, महेन्द्र टेलर, उपसभापति श्री अर्जुन मेवाड़ा, कैलाश निष्कलंक, नीलोफर बानू, विजय बहादुर, पुष्पा पालीवाल, हिम्मत मेहता, लता, गिरिराज कुमावत सहित  पार्षदों एवं आयोजक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने किया।

गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने बालिकाओं के हस्तकौशल की सराहना की

राजसमन्द, 22 मई/गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने राजसमन्द के भिक्षु निलयम में पण्डित दीनदयाल उपाध्याय बालिका उत्थान शिविर की संभागी बालिकाओं व महिलाओं द्वारा बनाई गई हस्तशिल्प सामग्री का अवलोकन किया और खूब सराहना की।

राज्यपाल ने फीता खोल कर हस्तकला प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उच्च शिक्षा मंत्री श्रीमती किरण माहेश्वरी, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिता भदेल, जिलाप्रमुख श्री प्रवेशकुमार सालवी, नगर परिषद के सभापति श्री सुरेश पालीवाल सहित जन प्रतिनिधिगण, अधिकारीगण और गणमान्य नागरिक तथा आयोजक संस्थाओं के प्रतिनिधि व पदाधिकारीगण मौजूद थे।

बालिकाओं के आग्रह पर राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा ने मॉडल्स के साथ फोटो भी खिंचवाया और आशीर्वाद दिया।

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