Archive For The “Mining” Category

चन्द्र भागा नदी का सीना छलनी कर चल रहा अवैध बजरी खनन का कारोबार

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विभाग ने बजरी के अवैध परिवहन पर टैक्टर जब्त कर बनाया चालान


आमेट। राज्य मे बजरी खनन पर रोक हेतु सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश के बावजूद आमेट क्षेत्र में खनिज विभाग की मिलीभगत से चन्द्र भागा नदी पेटे में धडल्ले से बजरी खनन माफिया अवैध रूप से बजरी खनन का कारोबार कर भवन निर्माणकर्ताओं को तीन गुने दामों में बेचने में लगे हुए है। वही बीती रात्रि को खनिज विभाग के कर्मचारियों ने गश्त के दौरान बजरी का अवैध परिवहन करते एक ट्रेक्टर पकड कर 26,400 रूपये का चालान बनाया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब डेढ माह पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में बजरी खनन पर रोक के सख्त निर्देश जारी किये थे।इसके बावजूद बजरी खनिज माफिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धता बताते हुए आमेट क्षेत्र की मुख्य एक मात्र नदी चन्द्र भागा के गांगागुडा, केनपुरिया, भीलमगरा, नयाखेडा,ढेलाणा, सेलागुडा, घोसुण्डी आदि क्षेत्र के पेटे से रात्रि को 9 से 12 बजे के मध्य बडी संख्या में डम्पर व ट्रेक्टर ट्रॉलियां भरकर आमेट कस्बे के अलावा आस पास के गांवों में धड़ल्ले से एक ट्रेक्टर टोली भरी बजरी पन्द्रह सौ से दो हजार रूपये की राशि में सप्लाई करने में लगे हुए हैं।
खनन माफियाओं द्वारा बेख़ौफ़ होकर धडल्लें से किये जा रहे अवैध बजरी खनन का प्रत्यक्ष प्रमाण आमेट नगर व ग्रामीण क्षेत्रों मे अनेक स्थानों पर सरकारी व निजी निर्माण कार्य स्थलों पर देखे जा सकते है। जिससे खनन विभाग की मिली भगत का अंदेशा नकारा नहीं जा सकता। जानकारी के अनुसार अवैध बजरी खननकर्ताओं से क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली लोग चोथ वसुली कर अपनी जेबें भी भरने में लगे हुए है । ज्ञात हुआ कि अवैध रूप से चोथ वसूली वाले लोग ट्रेक्टर मालिकों से प्रत्येक ट्रेक्टर ट्रॉली पर चार सौ से पांच सौ रूपये तक की राशि वसूलने में लगे है।

गत रात्रि को खनिज विभाग के उड़न दस्ते ने आमेट के समीप भीलवाड़ा मार्ग पर अवैध रूप से बजरी भर कर ले जा रहे एक ट्रेक्टर को पकड कर केशुलाल पिता भीमालाल गमेती निवासी लिकी का 26 हजार 400 रूपये का चालान बनाया है। इधर, ग्रामीणों का आरोप है कि आमेट क्षेत्र के चन्द्र भागा नदी में हो रहे अवैध बजरी खनन के कारोबार में खनिज विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत होने से अवैध बजरी खननकर्ताओं व चोथ वसुली करने वालों के हौसलें बुलंद है।

ग्रामीणों ने राजसमंद जिला कलेक्टर से मांग की है कि अपने स्तर पर एक टीम गठित करवा रात्रि में गश्त करवा बजरी के अवैध खनन को रूकवाया जाये।

इनका कहना है।….
खनिज विभाग के उडन दस्ते द्वारा अवैध बजरी खनन को लेकर नियमित रूप से क्षेत्र में चेकिंग की जा रही है। अगर कोई पकड़ में आता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी।-गोपाल बच्छ.खनि अभियन्ता आमेट

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हिन्दुस्तान जिंक द्वारा दरीबा में युवाओं को खनन क्षेत्र में प्रशिक्षण के छठे बैच का शुभारम्भ

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हिन्दुस्तान जिंक के दरीबा परिसर में जम्बों ड्रील आॅपरेटर के छठे बैच का उद्घाटन किया गया। राजस्थान से चयनित कुल 120 प्रशिक्षणार्थी उपस्थित थे। यह कार्यक्रम हिन्दुस्तान जिंक के तीन लोकेशन में आईआईएसडी एवं एससीएमएस के संयुक्त तत्वावधान से चलाया जा रहा है। चयनित आटीआई व डिप्लोमा उत्तिर्ण युवाओं द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दुस्तान जिंक दरीबा काॅम्पलेक्स के साईट प्रेसिडेंट के सी मीणा ने की।


शुभारंभ के अवसर पर के सी मीणा, साईट प्रसीडेन्ट दरीबा ने अपने उद्बोधन में कहा ‘‘सभी प्रशिक्षणार्थी आज से ही अपने भविष्य का आधार रखने जा रहे है। प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन एवं सुरक्षा के नियमों का पूरी तरह से पालन करें। जीवन में ईमानदारी, मेहनत एवं लगन से नियमों का पालन करगें तो सफलता आपके कदम चुमेगी ऐसा मेरा विश्वास है, और सफलता के दरवाजे आपके लिए हमेशा खुले रहेगें।‘‘
अपने उद्बोधन में संजय शर्मा ने कहा कि कुल 2700 युवाओं ने परीक्षा में भाग लिया जिनमें से 120 का लिखित, साक्षात्कार एवं मेडिकल परिक्षण के बाद योग्यतानुसार चयन किया गया, चयन में कटआॅफ 80 प्रतिशत रहा। यह प्रसन्नता का विषय है कि पूर्व के बैच से 136 युवाओं का ट्रेनिंग के दौरान ही केम्पस प्लेसमेन्ट हो गया जिनका औसत वेतन 25 हजा़र प्रतिमाह रहा। जिन मशीनों को चलाने के लिए विदेश से कुशल व्यक्ति आते है उनकी ट्रेनिंग हम यहीं पर करवा कर राजस्थान के युवाओं को अवसर प्रदान कर रहें है ।
कार्यक्रम के दौरान जम्बो ड्रील आॅपरेटर के रूप में कार्यरत प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभव बांटते हुए हिन्दुस्तान जिंक का आभार प्रकट करते हुए कहा कि हिन्दुस्तान जिंक द्वारा प्रशिक्षण के माध्यम से वह आज कुशल आॅपरेटर है। इस अवसर पर नव चयनित प्रशिक्षुओ ने हिन्दुस्तान जिंक का आभार व्यक्त किया एवं प्रशिक्षण को निष्ठा एवं लगन से पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस अवसर पर युवाओं के प्रोत्साहन के साथ साथ चौथे बेैच के टाॅपर्स थे उन्हें प्रमाण पत्र के साथ साथ नगद राशि से सम्मानित किया गया।
हिन्दुस्तान जिंक के हेड-कार्पोरेट कम्यूनिकेशन पवन कौशिक ने बताया कि हिन्दुस्तान जिंक वर्तमान समय की मांग के अनुसार भारत की संभवतया पहली माइनिंग एकेडमी की स्थापना के साथ देश में खनन क्षमता वर्धन में योगदान दे रहा है। यह निश्चित रूप से खनन क्षेत्र में भारत की क्षमता को बढ़ाने और देश को विकास पथ पर अग्रसर करने की ओर कदम है।
हिन्दुस्तान जिंक की ओर से सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत स्किल काउन्सिल फोर माईनिंग सेक्टर तथा इण्डियन इन्स्टीट्यूट आॅफ स्किल डवलपमेंट के सहयोग से राज्य के युवाओं को खनन क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सरकार से मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र युवाओं को अच्छा रोजगार प्राप्त करने में सहायक एवं अति महत्वपूर्ण होगा।


कार्यक्रम में संजय खटोड़ युनिट हेड राजपुरा दरीबा मांईस, सुनिल दिक्षित काॅमर्शियल हेड, अभय गौतम, हेड सीएसआर, रवि गुप्ता टे्निंग एचआर हेड, दीपक गखरेजा लोकशन एचआर हेड, राजपुरा दरीबा काॅम्पलेक्स एवं एससीएम से दिपक मिश्रा, आईआईएसडी से अंशुक तलवार उपस्थित थे ।
ज्ञातव्य रहे कि प्रशिक्षण के लिए अभ्यार्थी की शैक्षणिक योग्यता हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में दक्षता के साथ किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से इलेक्ट्रीशियन, फीटर, मैकेनिक,डीजल,मोटरड्राईंग एवं मैकेनिक,मैकेनिक मोटर गाडी में आई.टी.आई. अथवा मैकेनिक, आॅटोमोबाईल , माईंनिंग , इलेक्ट्रीकल में डिप्लोमाधारी हो। भारी एवं हल्के वाहन चलाने के लाईसेन्सधारी अभ्यार्थियों को प्राथमिकता दी गई थी।

प्रशिक्षण की अवधि डेढ़ वर्ष होगी। इस अवधि के पूर्व सफलतापूर्वक प्रशिक्षण करने एवं जांच परीक्षा में उत्तीर्णपरांत अभ्यार्थियों का प्रमाण पत्र के साथ-साथ देश विदेश में किन्ही भी खनन इकाईयों में आवश्यकता होने पर नियोजन हेतु मार्गदर्शन दिया जाएगा।

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अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की स्टोमिन – 2017 का हुआ आगाज

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अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की तकनीक खुद राजसमंद व्यापारियों के द्वार पहुँची है : हरि ओम सिंह राठौड

राजसमन्द। विश्व के मार्बल बाजार की सबसे बड़ी मार्बल मंडी कहे जाने वाले राजसमन्द जिले में स्टोन, मार्बल , ग्रैनाइट प्रोसेसिंग की नई तकनीकों के समावेश को लेकर दो दिवसीय स्टोमिन – 2017 एग्जीबिशन का शुभारम्भ शनिवार को हुआ। राजसमन्द के दी मेवाड़ क्लब में स्टोन हेल्प लाईन कॉर्पोरेशन द्वारा आयोजित 2 दिवसीय स्टोमिन – 2017 प्रदर्शनी का शुभारंभ राजसमन्द सांसद हरि ओम सिंह राठौड़ ने प्रदर्शनी का फिता काट कर किया।
इस दौरान आयोजित समारोह में सांसद राठौड़ ने कहा कि स्टोन, मार्बल, माईनिंग एवं ग्रेनाईट इण्डस्ट्री के व्यापारी समय की बाध्यतता और भारी भरकम मशीनरीज को लाने ले जाने की समस्या के चलते जयपुर और बैंग्लोर मे हाने वाले स्टोन एक्जीबिशन के बडे आयोजनों मे शायद हिस्सा लेने मे समर्थ नही हो पाते, लेकिन स्टोन इण्डस्ट्रीज मे उपयोग आने वाली नई तकनीकों के साथ राजसमंद मे स्टोमिन – 2017 का आयोजन कुछ ऐसा है जैसे नवीन तकनीक खुद व्यापारियों के द्वार पर चल कर आई है। व्यापारियों को इस मौके का ज्यादा से ज्यादा फायदा लेना चाहिये। इस प्रदर्शनी मे प्रदर्शित नई तकनीकों को अपने व्यवसाय मे उपयोग कर व्यवसाय हको हाईटेक रूप देना चाहिये जिससे कम समय मे ज्यादा उत्पादन और अधिक मुनाफा हो।
स्टोमिन के संयोजक मोहन बोहरा ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर मार्बल, माईनिंग और गे्रनाईट उद्योगों के विस्तार के लिए प्रदर्शनी आयोजित होती है, लेकिन भारत मे यह पहली बार है जब क्षैत्रीय स्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी मे 100 से ज्यादा कम्पनीज ने हिस्सा लिया है। इस प्रदर्शनी मे उदयपुर, अहमदाबाद, मुम्बई,  चेन्नई,  बैंग्लोर ओर दिल्ली के उद्योगपतियो ने स्टोन इंडस्ट्री, मार्बल, माइनिंग व ग्रेनाइट प्रोसेसिंग में उपयोग आने वाले नवीन तकनीकों से युक्त टूल्स की प्रदर्शनी लगाई है साथ ही कई विदेशी डिलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने भी इसमे हिस्स लिया है। उन्होने कहा कि राजसमंद मे लबातार मार्बल एवं ग्रेनाईट इण्डस्ट्रीज बढ रही है लेकिन नई तकनीकों के अभाव के कारण हम गुणवत्ता और अधिक मात्रा के उत्पादन मे पीठे है और राजसमंद मार्बल के इसी अभाव को खत्म करने के लिए नई तकनीकों से लैस स्टोमिन प्रदर्शनी का आयोजन यहां किया गया है।
जिला कलेक्टर ने किया अवलोकन
राजसमंद जिला कलेक्टर पी.सी. बेरवाल सहित रिको कटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शांतिलाल कोठारी, मोही गे्रनाईट एसो. अध्यक्ष दिग्विजय सिंह, उदयपुर मार्बल प्रोसेसर्स समिति अध्यक्ष विजय गोधा, राजसमंद मार्बल एसा. महासचिव रवि शर्मा, स्टोतिन डायरेक्टर मुकेश शर्मा, किशोर सिधवानी आदि ने स्टोमिन प्रदर्शनी मे स्टॉल्स का अवलोकन किया।
नई टेक्रोलोजी का रोबोटिक एक्सवेटर हुआ प्रदर्शित
स्टोमिन मे हुण्डई कम्पनी द्वारा अपने नये उत्पाद के रूप मे खास तौर से मार्बल और माईनिंग के लिए बनाये गये रोबोटिक एक्सवेटर का प्रदर्शन किया गया यह एक्सवेटर अन्य एक्सवेटर की तुलना मे बेहद मजबूत तो है ही साथ ही इसमे मेन्टनेंस और डिजल की खपत ना के बराबर है। इसमे खास बात यह भी है कि मार्बल और माईनिंग कार्य के दौरान इसके पार्टस मे किसी भी प्राकर की टूट फूट भी नही होगी और यह पहला रोबोटिक एक्सवेटर है जिसे हुण्डई कम्पनी ने 24 टन का बनाया है।
बिना वाईब्रेशन 10 गुना ज्यादा काम करेगा एल -डी- 4 
स्टोमिन मे प्रदर्शित एक खास तरह की हाईड्रोलिक एल-डी-4 ड्रिलींग मशीन का भी प्रदर्शन किया गया है जो अन्य ड्रिलींग मशीन के मुुकाबले 10 गुना ज्यादा काम करती है। इसमे खास बात यह भी है कि इसका हाईड्रोलिक सिस्टम इतना पावरफुल है कि ड्रिलींग के दौरान इसमे जरा भी वाईब्रेशन नही होता।

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दस दिवसीय संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

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राजसमन्द । एन0सी0सी0 आर्मी विंग यूनिट -10 राज0 बटा0एन0सी0सी0, उदयपुर की ओर से 10 दिवसीय संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन जवाहर नवोदय विद्यालय राजसमन्द में किया जा रहा है। इस शिविर में 514 छात्र एवं छात्रा कैडेट्स राजस्थान के विभिन्न जिलों यथा बांसवाडा, उदयपुर, राजसमन्द, भीलवाड़ा, प्रतापगढ, चित्तौड़गढ़ व डूंगरपुर आदि से भाग ले रहे हैं। यह शिविर 12 मई को सम्पन्न होगा ।
इस शिविर में कैम्प कमाण्डेन्ट ने सभी कैडेटों को सम्बोधित करते हुए एन0सी0सी0 के लक्ष्य ’’एकता और अनुशासन’’ की महत्ता व उसे बनाए रखने की सकारात्मक सोच के साथ देश का अच्छा नागरिक बनकर राष्ट्रसेवा में अहम भूमिका निभाने का लक्ष्य ध्यान में रखते हुए कार्य करने पर जोर दिया। उन्होंने एन0सी0सी0 संगठन को विश्व की सबसे बड़ी ’’यूथ यूनिफॉर्म फोर्स’’ बताते हुए इस युवा संगठन का सदस्य होने का गर्व महसूस कराया।


कैम्प कमाण्डेन्ट ने शिविर के दौरान दिये जाने वाले प्रशिक्षण जैसे फायरिंग, मेपरिडिंग, आब्स्टेकल कोर्स, ट्रैकिंग, हथियार प्रशिक्षण, टेंट पिचिंग, शारीरिक व्यायाम आदि का ब्यौरा दिया। इसके अतिरिक्त शिविर के दौरान होने वाली अन्य गतिविधियों जैसे वृक्षारोपण, गांव गोद लेने व अन्य समाजोन्मुखी कार्यों में सभी कैडेटों द्वारा अनिवार्य रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। इसी के साथ शिविर के दौरान रंगारंग कार्यक्रम जैसे एकल नृत्य, सामूहिक नृत्य, एकल गान, सामूहिक गान तथा कई अन्य प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएगी।







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खमनोर नाथद्वारा रोड़ पर गुजरते ट्रोलों से दुर्घटना का अंदेशा – बस स्टैंड के हालात गंभीर 

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खमनोर। बस स्टैंड प्रताप तिराहे सहित गांव के मुख्य मार्ग पर फैलती गन्दगी व लचर यातायात प्रबंधन से महाराणा प्रताप की रणभूमि हल्दीघाटी रक्त तलाई देखने आने वाले पर्यटक परेशान है। ग्राम पंचायत बस स्टैंड के सौंदर्यीकरण को चाह कर भी करा पाने में स्थानीय चंद अड़ंगेबाजो के चलते नाकाम रही है। आवारा पशुओं से फल सब्जी विक्रेता परेशान है वही चाय नाश्ता, ज्यूस बेचने वालों द्वारा सारी गन्दगी रात को सड़क पर डालने से जनता परेशान है। पशु यहाँ वह डाली गई गंदगी को खाकर अकाल काल का ग्रास बन रहे इस बात को भी नाकारा नहीं जा सकता है ।
टोल बचाने के चक्कर में गुजरने वाले ट्रोलों की वजह से यहां आये दिन लगने वाले जाम से दुर्घटना का भी अंदेशा है। बेतरतीब खड़े रहने वाले वाहनों से पैदल चलने वाला राहगीर परेशान हैं । स्टाफ की कमी से जूझते पुलिस विभाग की हालत तो यह है कि ट्रैफिक व्यवस्था केवल किसी वीआईपी के हल्दीघाटी आगमन पर ही यातायात व्यवस्था को चौबंद रख पाती है।
जनप्रतिनिधियों के साथ सौन्दर्यीकरण व यातायात व्यवस्था सुव्यवस्थित करने के लिए पूर्व में आयोजित कई बैठकों के आज दिन तक कोई परिणाम नजर नहीं आ रहे है।  बस स्टैंड पर बेतरतीब खड़े वाहन, बढ़ते स्थायी अस्थायी ठेले केबिन यहाँ प्रतीक्षारत राहगीरों को बैठने के लिए बनाये गये विश्राम घर को ही लुप्त कर चुके है।
ज्ञात रहे कि पूर्व में बस स्टैंड प्रताप तिराहे के इर्दगिर्द लगे केबिन धारकों को पंचायत द्वारा कियोस्क लगा कर व्यवस्थित कराने की योजना बनाई गई थी। स्थानीय अवसरवादी कंटकों द्वारा नाहक विरोध कर उसे लटका दिया गया था। वर्तमान में  यात्री प्रतीक्षालय पर शॉपिंग काम्प्लेक्स बनाने की घोषणाएं भी थोथी साबित हो रही हैं । पंचायत आज तक कोई ठोस विकास बस स्टैंड पर नहीं करा पाई है। कड़ी से कड़ी जुडी होने के बाद भी गांव में कांग्रेस की पंचायत होने से समस्या जस की तस है। महाराणा प्रताप की रणभूमि खमनोर हल्दीघाटी में जयंती व युद्धतिथि ( मई जून ) के अवसर पर मेले का भी आयोजन होना है देखना होगा कि प्रशासन धरोहर स्थलों की कितनी सुध लेता है।
इनका कहना है :- 
हमारा प्रयास है कि यात्री प्रतिक्षालय सहित बस स्टैंड का विकास शीघ्र हो ।कुछ अवसरवादी तत्वों द्वारा विकास कार्यो में बाधा पहुँचाने का प्रयास किया जाता रहा है। यातायात व्यवस्था हेतु दुपहिया वाहनों की पार्किंग हेतु पीली लाईन पुलिस प्रशासन की मदद से करवाई जाएगी।पंचायत स्तर पर ट्रेक्टर द्वारा प्रतिदिन गंदगी हटा कर सफाई करायी जाती है । आवारा पशु कहलाने वाले पशु के पालकों को चिन्हित कर सडकों पर नहीं  छोड़ने बाबत सूचित किया जायेगा ।
श्रीमती ममता वीरवाल – सरपंच ,ग्राम पंचायत खमनोर।
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बस स्टैंड पर बस खड़ी करने की भी कोई जगह आज तक सुनिश्चित नहीं हो पाई है। दुकानों के आगे बस खड़ी की जाती है। वैवाहिक अवसरों पर तो हालात और भी गंभीर हो जाते है। प्रशासन को इसकी सुध लेकर तहसील मुख्यालय पर विधिवत बस स्टैंड का निर्माण करना चाहिए।
रामचंद्र पालीवाल- अध्यक्ष-
महाराणा प्रताप एकीकृत व्यापार मंडल ,खमनोर ।
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भारत के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी वीर प्रताप की रणधारा राष्ट्रीय स्मारक से रक्त तलाई तक पर्यटकों की  सुलभ सुरक्षित पहुंच के प्रयास सरकार की प्रथम प्राथमिकता होना चहिये । कूट राजनीति के चलते क्षेत्र आज भी उपेक्षित है । ग्रामीण क्षेत्र में सुरक्षित यातायात,पूर्ण स्वच्छता, साफ सुथरी सड़क, पर्यटन विकास  सहित कई विषय आज भी अछूते है ।
कमल मानव
सामाजिक कार्यकर्त्ता , हल्दीघाटी पर्यटन समिति

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खनन नियमों की अनदेखी से खदानें बनीं मौत का कुंआ~ सौ से अधिक मौतों का जिम्मेदार कौन ?

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 राजसमंद(अजित उपाध्याय)। सुरक्षा इंतजामों को ताक में रख जिले में चल रही दो हजार से अधिक मार्बल खदाने श्रमिकों के लिए जानलेवा सिद्ध हो रहीं हैं। वहीं नियमों की पालना करवाने वाले जिम्मेदार कार्मिक आंखे मूंदकर बैठे हैं। बीते तीन सालों में तकरीबन सौ से अधिक श्रमिक खदानों में काम करते हुए काल का ग्रास बने हैं। ये सभी खदानों पर विस्फोटक सामग्री के उपयोग, गहरी खदानों में डम्पर व भारी मशाीनरी चलाने, पानी के होज में गिरने, विद्युत करंट लग जाने, पत्थरों के बीच में आ जाने, उंचाई से नीचे गिरने तथा अवैध अत्खनन आदि से अकारण ही मौत का शिकार हो गए। इसमें मरने वालों की संख्या कई खदानों पर तो दो से अधिक भी है। साथ ही धूल-मिट्टी के कारण सिलिकोसिस एवं दमा जैसी जानलेवा बीमारियां भी तेजी से बढ रहीं है। 

दुर्घटनाओं में श्रमिकों के गंभीर घायल होने एवं मृत्यु का ग्राफ लगातार बढता जा रहा है। कई मजदूर हाथ अथवा पैर कट जाने से पूर्ण रूप से बेरोजगार हो गए हैं। इसके बावजूद नियमानुसार खदानें चलाने में ना तो खदान मालिक गंभीरता दिखाते हैं और ना ही इसको लागू करवाने वाले जिम्मेदार अधिकारी कोई कठोर कार्यवाही करते हैं। ऐसे में मजदूर की मौत से मृतक से जुडा पूरा परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो जाता है। खदानों पर जब कोई दुर्घटना घटित होती है तब खदान मालिकों द्वारा बनाया गया एसोसिएशन, प्रभावशाली व्यक्ति और पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचकर केस को रफा-दफा करने के लिए मृतक के परिवार पर दबाव बनाकर औने पौने दामों में लाश पर सौदा कर लेते हैं। खान विभाग के साथ-साथ खान सुरक्षा व श्रम विभाग भी दुर्घटना पर कार्यवाही करने के लिए बराबर के जिम्मेदार होते हैं। लेकिन ये सरकारी विभाग भी महज खानापूर्ति कर अपने दायित्वों की इतिश्री करते हैं। इन्हीं कारणों से खदान मालिक भी बच जाता है और दुर्घटना की जिम्मेदारी सरकारी महकमे पर भी नहीं आती है।




खनिज विभाग खनन पट्टाधारियों को लीज आवंटन के साथ ही वैज्ञानिक आधार पर नक्शा स्वीकृत करता है। इसी के अनुसार खनन कार्य, मशीनरी कार्य, मजदूरों की सुरक्षा, पर्यावरण आदि विषयों को ध्यान में रखकर खनन कार्य किया जाना तय होता है। राजसमंद जिले में दो हजार से अधिक खदाने होने के बावजूद कोई पट्टाधारी ना तो स्वीकृत नक्शे के आधार पर खनन कार्य करते हैं और ना ही खान विभाग एवं श्रम विभाग इसके खिलाफ कोई कठोर कार्यवाही करते हैं। इस कारण बीते वर्षों में सौ से अधिक मजदूरों की मौत ने पूरे तंत्र पर प्रश्नचिन्ह खडे कर दिए हैं। स्वीकृत नक्शे से इतर जाकर किए गए खनन कार्य को आपराधिक कृत्य माना जाता है और उसके लिए संबंधित खनिज विभाग के अधिकारी व खनन पट्टााधारी जिम्मेदार होते हैं।
खान सुरक्षा विभाग प्रत्येक खदान मालिक को सुरक्षित खनन करने की गाईडलाईन जारी करते हैं। जिसमें मजदूरों की सुरक्षा की दृष्टि से खदान मालिक द्वारा मजदूरों को हेलमेट, लोंग शूज, हैंड ग्लव्स एवं मास्क इत्यादि उपकरण उपलब्ध कराने होते हैं। लेकिन विभाग द्वारा माॅनीटरिंग नहीं करने से वह केवल कागजी खानापूर्ति मात्र रह जाती है। जिसका खामियाजा निरपराध मजदूरों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पडता है।
नक्शा स्वीकृत करने वाला अधिकारी स्वीकृत नक्शे की पालना भी नहीं करवाते हैं और आंख मूंदकर बैठे रहते हैं। जिससे अवैध खनन को बढावा मिलता है और आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं।

खान विभाग द्वारा पट्टाधारियों को पांच वर्ष के लिए खनन हेतु नक्शा स्वीकृत किया जाता है। इस नक्शा के अनुसार खनन पट्टे में नियत स्थान पर ही खनन कार्य करना होता है। शेष खनन पट्टे में कार्यालय, मजदूर क्वार्टर, मशीनरी, पडोसी पट्टााधारी के आवागमन का मार्ग, डम्पिंग यार्ड, पर्यावरण के लिए वृक्षारोपण इत्यादि पट्टे में छुडाया जाता है। लेकिन खान विभाग के अधिकारियों द्वारा पर्याप्त निरीक्षण नहीं किए जाने से राजसमंद में सम्पूर्ण पट्टे पर अवैध खनन किए जा रहे हैं। जो पट्टाधारी द्वारा अपराध कारित किया जा रहा है। जिससे बडी संख्या में मौतें और दुर्घटनाएं हो रहीं है।
अनिल जोशी~वरिष्ठ अधिवक्ता, राजसमंद




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