जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव ने किया जेल का निरीक्षण – क्षमता से तीन गुना बंदी आवासरत

राजसमंद। माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय, खण्डपीठ जयपुर के पत्र की अनुपालना में 2 अप्रेल 2019 प्रातः 9.30 पर श्री नरेंद्र कुमार, सचिव, जिला, विधिक सेवा प्राधिकरण, राजसमंद द्वारा किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 8(3)(एम) की अनुपालना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्यालय पर स्थित जिला कारागृह, राजसमन्द का निरीक्षण किया गया।
वक्त निरीक्षण जिला कारागृह में कुल जिला कारागृह में 165 बन्दी आवासरत पाए गए जिनमें से 08 बन्दी सजायाप्ता तथा 157 बंदी विचाराधीन है। कारागृह में बन्दी क्षमता 55 बन्दीयों की है। जेल में बन्दी क्षमता से तिगुनी क्षमता में आवासरत है, जो गंभीर समस्या है। ऐसी भीषण गर्मी के समय में क्षमता से 03 गुणा बंदी अमानवीय परिस्थितियों में रह रहे है। बंदियों का अन्यत्र स्थानान्तरण अथवा शीघ्र नवीन जेल निर्माण आवश्यक है। मुख्य प्रहरी प्रहलाद कुमार ने बताया कि उपाधीक्षक, कारापाल व उपकारापाल के पद रिक्त है। बंदियो से वार्ता की गई, कारागृह में पानी की समस्या बताई गई। जिस हेतु जलदाय विभाग के अधीशाषी अभियन्ता से वार्ता की गई व समाधान करने हेतु कहा गया। जेल में निरूद्ध बंदियो में से किशन पिता उदयलाल बंदी ने नाबालिग होना बताया, जिस सम्बन्ध में एसीजेएम नाथद्वारा के पीठासीन अधिकारी से वार्ता करने पर प्रकट हुआ कि बंदी की आयु आधार कार्ड से 20 वर्ष है, उसे सुचित किया गया। इस प्रकार जेल में कोई बंदी 18 वर्ष से कम आयु का नहीं होना पाया गया। जेल में भोजन एवं साफ सफाई की व्यवस्था उचित पाई गई। वक्त निरीक्षण कारागृह, राजसमन्द में महिला बंदी निरोधित नहीं पाई गई।
साथ ही बन्दियों के मध्य विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन कर नि:शुल्क विधिक सहायता, पीडित प्रतिकर स्कीम 2011 एवं प्ली-बार्गेनिंग के बारे में विधिक जानकारी प्रदान की गई। निरीक्षण के दौरान जिला कारागृह स्टाफ उपस्थित रहा एवं सहयोग किया।

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