नाथद्वारा। प्रभु श्री नाथ जी के पावन धाम नाथद्वारा में बस स्टैण्ड़ के सौंदर्यीकरण की पहल करते हुए नगरपालिका ने प्राईवेट बस स्टैण्ड़ पर अपने आधिपत्य की 45 हजार वर्ग फीट भूमि पर कार्रवाई कर अतिक्रमण
से मुक्त कराई। मास्टर प्लान के अनुसार होने वाले विकास कार्यो को ध्यान में रख कर प्राइवेट बस ओनर्स ने भी सहयोग कर परिसर खाली कर
दिया। पालिका ने प्रशासन के सहयोग से प्राइवेट बस स्टैंड पर कार्रवाई के बाद
हाईवे के किनारे स्थित छोटे केबिनों को ध्वस्त कर पुराने रोडवेज बस स्टैण्ड के सामने व आसपास के थैला व्यावसायी व केबीनधारकों को भी मय पुलिस जाब्ते की मौजूदगी में बेदखल कर दिया। इस दौरान उपखण्ड़ अधिकारी
घनश्याम शर्मा,नगरपालिका आयुक्त आशीष शर्मा,पुलिस उप अधीक्षक राजेश
गुप्ता, प्रशिक्षु आरपीएस अधिकारी सुमित कुमार,,तहसीलदार हेमशंकर दशोरा
सहित बड़ी संख्या में नाथद्वारा आदर्श पुलिस थाने के जवान मौजूद थे।
भाजपा पार्षद एडवोकेट परेश सोनी ने केबिनों को हटाने पर कड़ी प्रतिक्रिया
देते हुए कहा कि पालिका ने एक ही दिन में केबिन धारकों को बिना मोहलत
व वैकल्पिक व्यवस्था के बेरोजगार कर दिया है।
खुद को ठगा सा महसूस कर इन केबीनधारकों ने उपखण्ड़ अधिकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर रखा है व शहर में मशाल रैली निकाल वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है।
आयुक्त आशीष शर्मा के अनुसार नगरपालिका क्षेत्र में सरकारी भूमि पर
किये गये सभी अतिक्रमणों को हटाया जायेगा। विकास की परिकल्पना के
अनुसार बरसों से बस स्टैण्ड़ को लेकर कई घटनाक्रम चल रहे है। लालबाग
रोडवेज बस स्टैण्ड़ बने अरसा बीत गया जो आज भी व्यवस्थित संचालित
नही हो पाया। पूर्व में भी बस स्टैण्ड़ पर परकोटा बना कर सभी को हटाया
गया पर विकास की योजना मूर्त रुप नहीं ले पाई।
वर्तमान प्रारुप के अनुसार नगर के वर्तमान हाईवे पर 1.8 किलोमीटर का
ओवर ब्रिज बनेगा व बसें सीधे पुल से यहां बनने वाले आधुनिक बहुमंजिला
स्टैण्ड़ पर आकर यात्रियों को उतारेगी व गंतव्य तक ले जायेगी। पार्किंग व
खरीदारी के लिए भी यहां सुविधा रहेगी व मन्दिर तक आवागमन हेतु
पोर्ट कारें उपलब्ध रहेगी। पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशीप के तहत होने वाले
विकास कार्य में मिराज समूह ने पहल कर अपनी मंशा सार्वजनिक की है।
नाथद्वारा बस स्टैण्ड़ से बेरोजगार हुए केबीनधारकों का प्रदर्शन
बलिदानी माटी को इन्साफ की दरकार
राजसमन्द। प्रातः स्मरणीय,वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की रणभूमि हल्दीघाटी व उनके जीवन से जुडे़ स्थलों के विकास कराने की जो कल्पना सन् 1976 में देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इन्दिरा गांधी ने की थी, उसे साकार करने में कांग्रेस सरकार की कोई खास दिलचस्पी नही दिखाई दे रही है।भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता के अमर सिपाही के रुप में मेवाड़ के सपूत महाराणा प्रताप ने देशभक्ति व मातृभूमि प्रेम के खातिर त्याग व बलिदान का अनुपम आदर्श प्रस्तुत किया था । प्रताप ने जीवनभर संघर्ष कर मातृभूमि को दुश्मनों से आजाद कराया।मेवाड़ काम्पलेक्स योजना के रुप में देश की जनता के सामने महाराणा प्रताप को समर्पित अहम योजना को चन्द स्वार्थी तत्वों व उदासीन जनप्रतिनिधीयों ने धूमिल कर दिया हैं।सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त मेवाड़ काम्पलेक्स योजना के प्रारुप के अनुसार हल्दीघाटी काॅम्पलेक्स विश्व में पहचान दिलाने में कारगर साबित होता यदि इसे ईमानदारी से लागू किया जाता। मेवाड़ काॅम्पलेक्स योजना के वर्तमान बिगडे़ हालात के लिए जनप्रतिनिधी व सरकारी अफसर जिम्मेदार है। सलाहकार समिति के सदस्य व गठित संस्थान ने अपने निजी हितों के आगे सरकार की महत्वपूर्ण योजना में भ्रष्टाचार का खुला प्रदर्शन किया है।21 जून 1996 में चेतक स्मारक के सामने स्थित पहाड़ी पर योजना की नीवं रखने के बाद सन् 2008 में राष्ट्रीय स्मारक अधूरा तैयार हुआ। विकास की इस गति से क्षेत्र का समूचा पर्यटन व्यवसाय एक निजी कथित संग्रहालय में हाट बाजार के रुप में कैद हो गया। 21 जून 2009 को समारोहपूर्वक अधूरे कार्यो को नजरअन्दाज कर राष्ट्रीय स्मारक का उद्घाटन हुआ। आज करीब तीन बरस बीत जाने के बाद भी इसका उचित संचालन नहीं होने से स्थानीय जनता में आक्रोश है।राष्ट्रीय स्मारक के संचालन का जिम्मा भी दो वर्ष के लिए महाराणा प्रताप स्मृति संस्थान को ना लाभ ना हानि के आधार पर संचालन के लिए सौंपा गया था। एम ओ यू के आधार पर स्मारक के सफल संचालन को कर पाने में विफल जिला प्रशासन आज भी मामले को लेकर गम्भीर नहीं दिखाई दे रहा हैं व स्मृति संस्थान के संस्थापक सदस्य के चल रहे निजी प्रदर्शन केन्द्र को बढावा दिये जा रहा है। पर्यटक यहां मौजूद बाजार से खरीदी कर रखे गये शस्त्रों को प्रतापकालीन समझ धोखा खा रहा है।स्मृति संस्था के पदेन अध्यक्ष स्वयं कलेक्टर है संस्थान के सदस्यों में हल्दीघाटी के विकास को लेकर कोई विशेष उत्साह नही हैं । ।सरकारी प्रयास के तहत पर्यटन मंत्रालय,भारत सरकार के यूएनडीपी कार्यक्रम में इण्डोजिनस ट्यूरिज्म प्रोजेक्ट के तहत दिसम्बर 2009 में लागू शिल्प कला को बढावा देने के लिए हल्दीघाटी में शिल्पग्राम के निर्माण की योजना भी पंचायत समिति खमनोर में धूल फांक रही है। यहां पर विश्व प्रसिद्ध मोलेला टेराकोटा तथा अन्य शिल्पकारों के उत्पाद बेचने हेतु ग्रामीण हाट का निर्माण कार्य होना था। हल्दीघाटी में राष्ट्रीय स्मारक के समीप बनने वाले चेतक शिल्पग्राम में लाखों रूपए की लागत से संग्रहालय का निर्माण करने की इस नई योजना से क्षेत्रवासीयों में नई उम्मीद जागी।शिल्पग्राम निर्माण से क्षेत्र में शिल्प कला को अपना रोजगार बनाने वाले वर्ग को महत्वपूर्ण स्थान मिल सकता था। यहां प्रतिदिन देश-विदेश में रहने वाले अप्रवासी तथा विदेशी लोगों का आवागमन रहता है। हल्दीघाटी के साथ मोलेला के विश्व प्रसिद्व टेराकोटा आर्ट को भी और ज्यादा ख्याति मिल सकती है।इस प्रोजेक्ट के तहत हल्दीघाटी में छह लाख रूपए की लागत से प्रवेश द्वार व करीब साढे छह लाख रूपए की लागत से कोटेज व अतिथि गृहों का निर्माण किया जाना था। पंचायत समिति खमनोर के निर्देशन में बनने वाले शिल्पग्राम के विभिन्न भवनों के लिए पूर्व में निविदाएं निकाली जा चुकी है लेकिन पंचायत समिति स्मर पर फैली उदासीनता से वर्तमान कोई ठेकेदार काम करने आगे नहीं आया।हल्दीघाटी के स्मारक की वर्तमान बदहालीे देख जनप्रतिनिधीयों नेविधानसभा में मामले को उठाया है। भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव एवंविधायक किरण माहेश्वरी ने महाराणा प्रताप के शौर्य की साक्षी रणभूमि हल्दीघाटी मे पर्यटन सुविधाऐं बढ़ाने के लिए विधानसभा में एक ताराकिंत प्रश्न पूछा था। सरकार ने बताया कि वहां पर कोई भी राजकीय संग्रहालय नहीं है। 1976 मे रेस्टवे संचालित किया गया था। यह वर्ष 2002 से केवल एक वर्ष की अवधि को छोड़ कर अब तक बंद है। हल्दीघाटी मे विकास, संरक्षण और लोकप्रियता बढाने के लिए सरकार के पास कोई विशेष योजना नहीं है। इन वर्षो मे वहां केवल सम्पर्क सड़क, चेतक समाधि स्थल का विकास एवं ओपन एयर थिएटर बनाया गया है। प्रताप जयंति पर खमनोर में सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाते है। किरण ने पूरक प्रश्न द्वारा मेवाड़ काम्ॅपलेक्स के दर्शनीय स्थलों के लिए एक पृथक पर्यटन परिपथ बनाने की मांग की। हल्दीघाटी के विकास के लिए समग्र योजना बनाने, वहां पर ध्वनी एवं प्रकाश कार्यक्रम प्रारम्भ करने एवं संग्रहालय स्थापित करने की भी मांग की। यदि हल्दीघाटी का पूर्ण विकास किया जाए, परिवहन सुविधाऐं बढ़ाई जाए तो यहां पर प्रतिवर्ष लाखो पर्यटक आ सकते है। यह राजस्थान के सर्वाधिक ऐतिहासिक महत्व का स्थल है यदि सरकार महाराणा प्रताप, सांगा एवं कुम्भा की शोर्यगाथाओं को पर्यटन विकास की दृष्टि से महत्व दें, तो मेवाड़ अंचल विश्व पर्यटन का एक बड़ा केन्द्र बन सकता है।ज्ञात रहे कि जिला प्रशासन सरकारी संग्रहालय के निर्माण व स्मारक के संचालन से ज्यादा निजी कथित संग्रहालय के विकास में तल्लीन हैं जिसका उदाहरण दिसम्बर 2008 में सरकार बनते ही 5 बीघा चरागाह भूमि का किस्म परिवर्तन कर मात्र 60000रुपये प्रति बीघा में अतिक्रमण करने वाले व्यवसायी को ही आवंटित कर दी है। पूर्व में प्राकृतिक नाले को मूंद कर जमीन हथियाने वाले कथित संग्रहालय मालिक ने वर्तमान मे पार्किंग हेतु स्मारक की भूमि पर समतलीकरण करा दिया है।हल्दीघाटी विकास की पैरवी करने वाले मेवाड़ काॅम्पलेक्स योजना मंे सलाहकार सदस्य व पूर्व के ठेकेदार द्वारा निजी प्रदर्शनी बना उसे संग्रहालय का नाम देने से मूल हल्दीघाटी का विकास आज भी अवरुद्ध है। हल्दीघाटी का ग्रामीण पर्यटन भ्रष्टाचार की कैद में इन्साफ की दरकार कर रहा है।राजसमन्द। प्रातः स्मरणीय,वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप की रणभूमि हल्दीघाटी व उनके जीवन से जुडे़ स्थलों के विकास कराने की जो कल्पना सन् 1976 में देश की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इन्दिरा गांधी ने की थी, उसे साकार करने में कांग्रेस सरकार की कोई खास दिलचस्पी नही दिखाई दे रही है। भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता के अमर सिपाही के रुप में मेवाड़ के सपूत महाराणा प्रताप ने देशभक्ति व मातृभूमि प्रेम के खातिर त्याग व बलिदान का अनुपम आदर्श प्रस्तुत किया था । प्रताप ने जीवनभर संघर्ष कर मातृभूमि को दुश्मनों से आजाद कराया। मेवाड़ काम्पलेक्स योजना के रुप में देश की जनता के सामने महाराणा प्रताप को समर्पित अहम योजना को चन्द स्वार्थी तत्वों व उदासीन जनप्रतिनिधीयों ने धूमिल कर दिया हैं। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त मेवाड़ काम्पलेक्स योजना के प्रारुप के अनुसार हल्दीघाटी काॅम्पलेक्स विश्व में पहचान दिलाने में कारगर साबित होता यदि इसे ईमानदारी से लागू किया जाता। मेवाड़ काॅम्पलेक्स योजना के वर्तमान बिगडे़ हालात के लिए जनप्रतिनिधी व सरकारी अफसर जिम्मेदार है। सलाहकार समिति के सदस्य व गठित संस्थान ने अपने निजी हितों के आगे सरकार की महत्वपूर्ण योजना में भ्रष्टाचार का खुला प्रदर्शन किया है। 21 जून 1996 में चेतक स्मारक के सामने स्थित पहाड़ी पर योजना की नीवं रखने के बाद सन् 2008 में राष्ट्रीय स्मारक अधूरा तैयार हुआ। विकास की इस गति से क्षेत्र का समूचा पर्यटन व्यवसाय एक निजी कथित संग्रहालय में हाट बाजार के रुप में कैद हो गया। 21 जून 2009 को समारोहपूर्वक अधूरे कार्यो को नजरअन्दाज कर राष्ट्रीय स्मारक का उद्घाटन हुआ। आज करीब तीन बरस बीत जाने के बाद भी इसका उचित संचालन नहीं होने से स्थानीय जनता में आक्रोश है।राष्ट्रीय स्मारक के संचालन का जिम्मा भी दो वर्ष के लिए महाराणा प्रताप स्मृति संस्थान को ना लाभ ना हानि के आधार पर संचालन के लिए सौंपा गया था। एम ओ यू के आधार पर स्मारक के सफल संचालन को कर पाने में विफल जिला प्रशासन आज भी मामले को लेकर गम्भीर नहीं दिखाई दे रहा हैं व स्मृति संस्थान के संस्थापक सदस्य के चल रहे निजी प्रदर्शन केन्द्र को बढावा दिये जा रहा है। पर्यटक यहां मौजूद बाजार से खरीदी कर रखे गये शस्त्रों को प्रतापकालीन समझ धोखा खा रहा है। स्मृति संस्था के पदेन अध्यक्ष स्वयं कलेक्टर है संस्थान के सदस्यों में हल्दीघाटी के विकास को लेकर कोई विशेष उत्साह नही हैं । ।सरकारी प्रयास के तहत पर्यटन मंत्रालय,भारत सरकार के यूएनडीपी कार्यक्रम में इण्डोजिनस ट्यूरिज्म प्रोजेक्ट के तहत दिसम्बर 2009 में लागू शिल्प कला को बढावा देने के लिए हल्दीघाटी में शिल्पग्राम के निर्माण की योजना भी पंचायत समिति खमनोर में धूल फांक रही है। यहां पर विश्व प्रसिद्ध मोलेला टेराकोटा तथा अन्य शिल्पकारों के उत्पाद बेचने हेतु ग्रामीण हाट का निर्माण कार्य होना था। हल्दीघाटी में राष्ट्रीय स्मारक के समीप बनने वाले चेतक शिल्पग्राम में लाखों रूपए की लागत से संग्रहालय का निर्माण करने की इस नई योजना से क्षेत्रवासीयों में नई उम्मीद जागी। शिल्पग्राम निर्माण से क्षेत्र में शिल्प कला को अपना रोजगार बनाने वाले वर्ग को महत्वपूर्ण स्थान मिल सकता था। यहां प्रतिदिन देश-विदेश में रहने वाले अप्रवासी तथा विदेशी लोगों का आवागमन रहता है। हल्दीघाटी के साथ मोलेला के विश्व प्रसिद्व टेराकोटा आर्ट को भी और ज्यादा ख्याति मिल सकती है। इस प्रोजेक्ट के तहत हल्दीघाटी में छह लाख रूपए की लागत से प्रवेश द्वार व करीब साढे छह लाख रूपए की लागत से कोटेज व अतिथि गृहों का निर्माण किया जाना था। पंचायत समिति खमनोर के निर्देशन में बनने वाले शिल्पग्राम के विभिन्न भवनों के लिए पूर्व में निविदाएं निकाली जा चुकी है लेकिन पंचायत समिति स्मर पर फैली उदासीनता से वर्तमान कोई ठेकेदार काम करने आगे नहीं आया। हल्दीघाटी के स्मारक की वर्तमान बदहालीे देख जनप्रतिनिधीयों ने विधानसभा में मामले को उठाया है। भाजपा की राष्ट्रीय महासचिव एवं विधायक किरण माहेश्वरी ने महाराणा प्रताप के शौर्य की साक्षी रणभूमि हल्दीघाटी मे पर्यटन सुविधाऐं बढ़ाने के लिए विधानसभा में एक ताराकिंत प्रश्न पूछा था। सरकार ने बताया कि वहां पर कोई भी राजकीय संग्रहालय नहीं है। 1976 मे रेस्टवे संचालित किया गया था। यह वर्ष 2002 से केवल एक वर्ष की अवधि को छोड़ कर अब तक बंद है। हल्दीघाटी मे विकास, संरक्षण और लोकप्रियता बढाने के लिए सरकार के पास कोई विशेष योजना नहीं है। इन वर्षो मे वहां केवल सम्पर्क सड़क, चेतक समाधि स्थल का विकास एवं ओपन एयर थिएटर बनाया गया है। प्रताप जयंति पर खमनोर में सांस्कृतिक कार्यक्रम किए जाते है। किरण ने पूरक प्रश्न द्वारा मेवाड़ काम्ॅपलेक्स के दर्शनीय स्थलों के लिए एक पृथक पर्यटन परिपथ बनाने की मांग की। हल्दीघाटी के विकास के लिए समग्र योजना बनाने, वहां पर ध्वनी एवं प्रकाश कार्यक्रम प्रारम्भ करने एवं संग्रहालय स्थापित करने की भी मांग की। यदि हल्दीघाटी का पूर्ण विकास किया जाए, परिवहन सुविधाऐं बढ़ाई जाए तो यहां पर प्रतिवर्ष लाखो पर्यटक आ सकते है। यह राजस्थान के सर्वाधिक ऐतिहासिक महत्व का स्थल है यदि सरकार महाराणा प्रताप, सांगा एवं कुम्भा की शोर्यगाथाओं को पर्यटन विकास की दृष्टि से महत्व दें, तो मेवाड़ अंचल विश्व पर्यटन का एक बड़ा केन्द्र बन सकता है। ज्ञात रहे कि जिला प्रशासन सरकारी संग्रहालय के निर्माण व स्मारक के संचालन से ज्यादा निजी कथित संग्रहालय के विकास में तल्लीन हैं जिसका उदाहरण दिसम्बर 2008 में सरकार बनते ही 5 बीघा चरागाह भूमि का किस्म परिवर्तन कर मात्र 60000रुपये प्रति बीघा में अतिक्रमण करने वाले व्यवसायी को ही आवंटित कर दी है। पूर्व में प्राकृतिक नाले को मूंद कर जमीन हथियाने वाले कथित संग्रहालय मालिक ने वर्तमान मे पार्किंग हेतु स्मारक की भूमि पर समतलीकरण करा दिया है।हल्दीघाटी विकास की पैरवी करने वाले मेवाड़ काॅम्पलेक्स योजना मंे सलाहकार सदस्य व पूर्व के ठेकेदार द्वारा निजी प्रदर्शनी बना उसे संग्रहालय का नाम देने से मूल हल्दीघाटी का विकास आज भी अवरुद्ध है। हल्दीघाटी का ग्रामीण पर्यटन भ्रष्टाचार की कैद में इन्साफ की दरकार कर रहा है।
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